लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर चला बुलडोजर, कार्रवाई को लेकर बढ़ा विवाद

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सिविल कोर्ट और पुराने हाई कोर्ट परिसर के बाहर बने वकीलों के चैंबरों पर नगर निगम ने बुलडोजर चलाया, जिसके बाद अधिवक्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला।

मामला पुराने हाई कोर्ट और स्वास्थ्य भवन चौराहे के बाहर वर्षों से बने वकीलों के चैंबरों का है। सुबह अचानक नगर निगम और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और सड़क किनारे बने चैंबरों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन का कहना है कि ये सभी अवैध निर्माण थे और अतिक्रमण हटाने के तहत कार्रवाई की जा रही थी।

लेकिन जैसे ही बुलडोजर आगे बढ़ा, वकीलों का विरोध भी तेज हो गया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने हाई कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल किया है। वकीलों का दावा है कि अदालत ने केवल 72 चैंबर हटाने के निर्देश दिए थे, जबकि प्रशासन ने करीब 240 चैंबरों को तोड़ना शुरू कर दिया।

वकीलों का कहना है कि ये चैंबर सिर्फ ढांचे नहीं थे, बल्कि वर्षों से उनकी रोजी-रोटी और पेशे का हिस्सा थे। इन्हीं चैंबरों में बैठकर अधिवक्ता अपने मुवक्किलों से मिलते और केस से जुड़ा काम करते थे। अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

कार्रवाई के दौरान कई वकीलों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ वकीलों ने विरोध में खुद को चैंबरों के अंदर बंद कर लिया, जबकि कई की तबीयत भी बिगड़ गई। प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि वे पिछले 30 सालों से वहां बैठ रहे हैं और जिन चैंबरों को हटाने के आदेश थे, उनमें उनके चैंबर शामिल नहीं थे।

वकीलों ने प्रशासन से सवाल किया कि अगर उन्हें हटाया जा रहा है तो उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना किसी उचित पुनर्वास के इस तरह की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है।

वहीं प्रशासन अपनी कार्रवाई को पूरी तरह कानूनी बता रहा है। DCP पश्चिम Kamlesh Dixit ने कहा कि सभी संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका था और कोर्ट के आदेश के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों में विरोध होना सामान्य बात है और प्रशासन इसके लिए तैयार था।

फिलहाल इस बुलडोजर कार्रवाई को लेकर वकीलों का विरोध जारी है और पूरे मामले ने Uttar Pradesh की राजनीति और प्रशासनिक कार्रवाई पर नई बहस छेड़ दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *