नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। हादसे के बाद से फरार चल रहे भवन मालिक और मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे हरिराम बंसल को दिल्ली पुलिस ने राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की विशेष टीम उसे हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है और हादसे से जुड़े कानूनी तथा तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।
इस हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम यानी MCD भी एक्शन मोड में आ गया है। निगम ने दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी लंबित रखी गई है।
भिवाड़ी से पकड़ा गया मकान मालिक हरिराम
सत्य निकेतन में PG इमारत ढहने के बाद से भवन मालिक हरिराम बंसल लगातार फरार चल रहा था। उसे पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई टीमें गठित की थीं। पुलिस की अलग-अलग टीमें दिल्ली और हरियाणा समेत कई संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं।
अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उससे हादसे से जुड़े कई पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इमारत की वास्तविक स्थिति क्या थी, निर्माण और उपयोग से जुड़े नियमों का पालन हुआ था या नहीं और हादसे के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका रही।
हरिराम को पकड़ने के लिए बनाई गई थीं 10 टीमें
पुलिस ने मकान मालिक की गिरफ्तारी के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया था। जानकारी के मुताबिक, आरोपी को पकड़ने के लिए कुल 10 अलग-अलग पुलिस टीमें बनाई गई थीं।
इन टीमों में जिले की स्थानीय पुलिस, स्पेशल स्टाफ और अलग-अलग ऑपरेशन यूनिट के पुलिसकर्मी शामिल थे। इन सभी टीमों की निगरानी और नेतृत्व एडिशनल DCP रैंक के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा था।
पुलिस की टीमें आरोपी की तलाश में दिल्ली और हरियाणा में संभावित ठिकानों पर लगातार रेड कर रही थीं। आखिरकार उसे राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ लिया गया।
MCD के पांच वरिष्ठ अधिकारी निलंबित
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने भी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के विजिलेंस विभाग की ओर से जारी अलग-अलग कार्यालय आदेशों के मुताबिक, दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
7 सितंबर 2026 को जारी आदेशों के तहत निलंबित अधिकारियों में प्रशासनिक और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।
निलंबित अधिकारियों की सूची इस प्रकार है:
- राकेश कुमार — डिप्टी कमिश्नर, दक्षिण जोन
- रणवीर सिंह — सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, SE/दक्षिण जोन
- ललित कुमार गोयल — एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, EE-बिल्डिंग
- सुनील चौहान — असिस्टेंट इंजीनियर, AE-बिल्डिंग
- आशीष कुमार — जूनियर इंजीनियर, JE-बिल्डिंग
किस नियम के तहत किया गया निलंबन?
MCD आयुक्त के निर्देशों के अनुपालन में जारी आदेशों में बताया गया है कि संबंधित अधिकारियों को DMC Services (Control & Appeal) Regulations, 1959 के Regulation 5(2) के तहत निलंबित किया गया है।
निलंबन की अवधि के दौरान अधिकारियों को नियमानुसार निर्वाह भत्ता दिए जाने का प्रावधान है। संबंधित आदेशों की आधिकारिक प्रतियां MCD आयुक्त सहित संबंधित वरिष्ठ विभागों और अधिकारियों को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।
हालांकि, जारी दस्तावेजों में किसी विशेष अनियमितता का विस्तृत ब्योरा दर्ज नहीं किया गया है। इसके बावजूद इस कार्रवाई को सत्य निकेतन की इमारत से जुड़े कथित जर्जर या नियमों के उल्लंघन वाले निर्माण की निगरानी में लापरवाही के संदर्भ में देखा जा रहा है। अंतिम जिम्मेदारी और किसी भी लापरवाही की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होगी।
सत्य निकेतन में कैसे हुआ था इतना बड़ा हादसा?
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे पांच मंजिला PG इमारत अचानक ढह गई थी। बताया गया कि इमारत करीब 30 साल पुरानी थी।
इमारत के गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।
हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें छह छात्र बताए गए हैं, जबकि एक मजदूर भी हादसे का शिकार हुआ। इसके अलावा राहत और बचाव अभियान के दौरान 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी दी गई है।
हादसे के बाद से फरार था मकान मालिक
इमारत गिरने की घटना के बाद मकान मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी। हादसे के बाद उसके फरार होने के कारण पुलिस ने उसकी तलाश के लिए विशेष टीमें लगाईं।
जिले की स्थानीय पुलिस के साथ स्पेशल स्टाफ और ऑपरेशन यूनिट को भी तलाश अभियान में शामिल किया गया था। अलग-अलग टीमों को संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने और आरोपी को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का फोकस इस बात पर रहेगा कि इमारत की हालत कैसी थी और क्या सुरक्षा मानकों या निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन की वजह से यह हादसा हुआ।
हादसे के बाद MCD की कार्रवाई से उठे जवाबदेही के सवाल
सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत के बाद MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब जांच में यह स्पष्ट करना अहम होगा कि संबंधित विभागों ने इमारत की स्थिति की निगरानी किस तरह की थी और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी।
वहीं, मकान मालिक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ से भी हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
अब जांच से सामने आएगी हादसे की पूरी तस्वीर
फिलहाल सत्य निकेतन हादसे में पुलिस और नगर निगम दोनों स्तर पर कार्रवाई जारी है। एक तरफ पुलिस गिरफ्तार मकान मालिक से पूछताछ कर रही है, तो दूसरी ओर MCD ने पांच अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय करना है। यदि जांच में किसी व्यक्ति या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके आधार पर आगे कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
सत्य निकेतन का यह हादसा दिल्ली में पुरानी और PG के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
