सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत: चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला शव, निठारी कांड से जुड़ा रहा नाम

हरिद्वार: देशभर में चर्चित निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुक्रवार, 18 सितंबर को उत्तरी हरिद्वार के सप्त ऋषि क्षेत्र में एक चाय की दुकान के भीतर उनका शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस ने मौत की अंतिम वजह को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मौके से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है।

सप्त सरोवर रोड की चाय की दुकान में मिला शव

जानकारी के मुताबिक, घटना हरिद्वार शहर कोतवाली क्षेत्र की सप्त ऋषि पुलिस चौकी के अंतर्गत सप्त सरोवर रोड पर हुई। यह स्थान लालमाता मंदिर के सामने बताया जा रहा है। पुलिस को चाय की दुकान के भीतर एक व्यक्ति के फंदे पर लटके होने की सूचना मिली थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में की। पुलिस के अनुसार वह मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र के मंगरुखाल गांव का रहने वाला था।

कुछ समय से हरिद्वार में चला रहा था चाय का खोखा

पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और चाय की दुकान चलाकर जीवनयापन कर रहा था। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, वह सप्त सरोवर रोड के आसपास किराए पर चाय का खोखा चला रहा था। उसकी मौत की खबर सामने आने के बाद पुलिस ने उसके परिवार को सूचना दे दी है। घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझने के लिए पुलिस आसपास के लोगों और उससे जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटा रही है।

मौके से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट

पुलिस के लिए इस मामले में सबसे अहम पहलुओं में से एक यह है कि दुकान से अब तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। शुरुआती स्तर पर आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, लेकिन मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने के बाद रिपोर्ट से भी मौत की परिस्थितियों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पारिवारिक विवाद की आशंका, लेकिन कारण अभी स्पष्ट नहीं

पुलिस की शुरुआती जांच में पारिवारिक विवाद को संभावित वजह के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई निर्णायक तथ्य सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर मौत का कारण निश्चित रूप से बताया जा सके। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है और परिजनों से भी जानकारी ली जा रही है। इसलिए फिलहाल आत्महत्या के पीछे की वजह को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

कौन था सुरेंद्र कोली? निठारी कांड में सामने आया था नाम

सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में सामने आए नोएडा के चर्चित निठारी कांड से जुड़ा था। निठारी में बच्चों के लापता होने और हत्या से जुड़े मामले ने देशभर में सनसनी फैला दी थी। जांच के बाद सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ कई आपराधिक मामले चले। अलग-अलग मामलों में अदालतों में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और कोली को कई मामलों में दोषी भी ठहराया गया था।

सुप्रीम कोर्ट से 2025 में मिली थी बड़ी राहत

सुरेंद्र कोली के मामले में 2025 में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम हुआ। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी हत्याकांड से जुड़े कई मामलों में उसकी बरी किए जाने की पुष्टि की थी। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी से जुड़े अंतिम लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि समान साक्ष्य के आधार पर जुड़े मामलों में पहले ही बरी किए जाने की स्थिति में उसकी दोषसिद्धि कायम रखना उचित नहीं था।

करीब दो दशक तक जेल और फिर बदली जिंदगी

निठारी कांड से जुड़े मामलों के कारण सुरेंद्र कोली ने लंबे समय तक जेल में बिताया। उसकी कानूनी लड़ाई कई वर्षों तक चली और 2025 में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद निठारी से जुड़े उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामले समाप्त हो गए। इसके बाद वह हरिद्वार में रहने लगा और चाय की दुकान चलाकर जीवन गुजार रहा था। अब उसकी हरिद्वार में हुई मौत ने एक बार फिर निठारी कांड से जुड़े पुराने घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है।

पुलिस जांच में सामने आएगा मौत का असली कारण

फिलहाल हरिद्वार पुलिस सुरेंद्र कोली की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। चूंकि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए पुलिस मौत के कारण और उससे पहले की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के बाद ही मौत की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

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