झारखंड : झारखंड के चर्चित सांसद हत्याकांड में शामिल रही और वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी महिला माओवादी कमांडर शकुंतला महतो उर्फ ‘पुष्पा’ ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर दिया है। करीब ढाई दशक तक सक्रिय रही और 10 लाख रुपये की इनामी इस महिला नक्सली ने 17 जून को कोलकाता के लालबाजार स्थित पुलिस मुख्यालय में हथियारों के साथ सरेंडर कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
शकुंतला महतो का नाम झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं से जुड़ा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं।
सांसद सुनील महतो हत्याकांड से सुर्खियों में आई थी शकुंतला
4 मार्च 2007 को पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला क्षेत्र स्थित बाघुड़िया फुटबॉल मैदान में हुए हमले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। इस हमले में तत्कालीन सांसद सुनील महतो और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार इस हमले में शकुंतला महतो की सक्रिय भूमिका थी। इसी घटना के बाद वह सुरक्षा एजेंसियों की सबसे वांछित माओवादी कमांडरों की सूची में शामिल हो गई थी। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियां और राज्य पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं।
बचपन में संगठन से जुड़ी, फिर बनी माओवादी नेटवर्क की अहम कड़ी
पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी क्षेत्र स्थित मेचुआ गांव की रहने वाली शकुंतला महतो बेहद कम उम्र में माओवादी संगठन के संपर्क में आ गई थी। बताया जाता है कि उसने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की और बाद में संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने लगी।
संगठन के भीतर वह विभिन्न नामों से जानी जाती थी और समय के साथ उसने माओवादी ढांचे में अपनी मजबूत पहचान बना ली। वर्ष 2003 में उसकी मुलाकात झारग्राम क्षेत्र के एक माओवादी कमांडर से हुई थी, जिसके बाद वह संगठन की गतिविधियों में और अधिक सक्रिय हो गई।
शीर्ष माओवादी नेताओं की करीबी मानी जाती थी
शकुंतला महतो को माओवादी संगठन के पूर्व शीर्ष नेता किशनजी का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह पूर्वी क्षेत्रीय नेटवर्क और जोनल स्तर की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।
बाद के वर्षों में वह कई वरिष्ठ माओवादी नेताओं के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों को संचालित करती रही। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के जंगल क्षेत्रों में सक्रिय नेटवर्क से उसका गहरा जुड़ाव बताया जाता है।
कई थानों में दर्ज हैं गंभीर मामले
पूर्वी सिंहभूम जिले के गालूडीह, धालभूमगढ़, पटमदा और बोड़ाम समेत विभिन्न थाना क्षेत्रों में उसके खिलाफ नक्सली हिंसा और अन्य गंभीर मामलों से संबंधित केस दर्ज हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि कई बड़े हमलों और माओवादी अभियानों में उसकी भूमिका रही है।
लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण उसका नाम सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिक सूची में शामिल था और उस पर राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
हथियार और कारतूस के साथ किया आत्मसमर्पण
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शकुंतला महतो ने आत्मसमर्पण के दौरान आधुनिक हथियारों और बड़ी मात्रा में कारतूस भी जमा कराए। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसके सरेंडर से क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय से सक्रिय कई माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण के बाद संगठन की गतिविधियों पर असर पड़ा है और शकुंतला का मुख्यधारा में लौटना भी उसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता
करीब 25 वर्षों तक भूमिगत रहकर सक्रिय रही शकुंतला महतो का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे क्षेत्र में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ सकता है और शांति बहाली के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
