Dhruv Rathee Video: ‘सोते हुए उठाया, किडनैप किया गया’, रिहाई के बाद ध्रुव राठी के गंभीर आरोप, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

Dhruv Rathee Latest News: यूट्यूबर ध्रुव राठी ने रिहा होने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि 10 अक्टूबर 2026 की सुबह उन्हें गुरुग्राम स्थित उनके घर से उस समय ले जाया गया, जब वह सो रहे थे। ध्रुव राठी के मुताबिक, सादे कपड़ों में आए लोगों ने उनके घर में प्रवेश किया, उन्हें बेडरूम से उठाया और अपने साथ ले गए। उन्होंने इस कार्रवाई को गिरफ्तारी या हिरासत के बजाय ‘किडनैपिंग’ बताया। राठी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपने परिवार और वकीलों से संपर्क करने का मौका नहीं मिला तथा इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं। हालांकि, ये सभी आरोप ध्रुव राठी की ओर से वीडियो में लगाए गए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना जरूरी है। CJP के विरोध प्रदर्शन से पहले हुई इस कार्रवाई को लेकर उन्होंने नागरिक अधिकारों, शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

रिहाई के बाद ध्रुव राठी ने जारी किया वीडियो, पुलिस पर लगाए आरोप

ध्रुव राठी ने रिहा होने के बाद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने अपने साथ हुई घटना का विवरण देते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनके दावे के अनुसार, उन्हें 10 अक्टूबर की सुबह उनके घर से ले जाया गया और अगले दिन तड़के करीब 3 बजे रिहा किया गया।

राठी ने कहा कि उन्हें जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस अपने साथ ले गई थी। उनके मुताबिक, रिहाई के समय उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि वह दोबारा जंतर-मंतर पहुंचे, तो उनके खिलाफ फिर से कार्रवाई की जा सकती है।

अपने वीडियो में उन्होंने पूरी कार्रवाई के तरीके पर आपत्ति जताई और सवाल किया कि किसी व्यक्ति को उसके घर से ले जाते समय कानूनी प्रक्रिया और उसके अधिकारों का पालन किया गया या नहीं। इस मामले में पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

‘सुबह 7 बजे सो रहा था, तभी घर की घंटी बजी’

ध्रुव राठी ने वीडियो में बताया कि शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 7 बजे वह अपने घर में सो रहे थे। इसी दौरान दरवाजे की घंटी बजी। उनके मुताबिक, उनकी मां ने दरवाजा खोला तो बाहर कई लोग मौजूद थे, जो सादे कपड़ों में थे।

राठी का आरोप है कि उन लोगों ने उनकी मां को धक्का दिया और घर के अंदर प्रवेश कर सीधे उनके बेडरूम तक पहुंच गए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सोते हुए उठाया गया और विरोध करने के बावजूद अपने साथ ले जाया गया।

यूट्यूबर ने कहा कि उनके अनुसार, मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें किस कानूनी आधार पर ले जाया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने अपनी वीडियो में इस घटना को ‘किडनैपिंग’ करार दिया। यह उनका व्यक्तिगत आरोप है; घटना के दौरान वास्तव में कौन-कौन मौजूद था और कार्रवाई किस आधार पर की गई, इसकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों के पक्ष से होनी बाकी है।

‘50 से ज्यादा लोग घर के बाहर थे’, घसीटकर ले जाने का दावा

ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर 50 से अधिक लोग मौजूद थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस तरह अपने साथ ले जाया गया, जैसे वह कोई गंभीर अपराध करने वाले व्यक्ति हों। राठी के अनुसार, इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं।

उन्होंने बताया कि घर से ले जाने के बाद उन्हें एक थाने में पहुंचाया गया और फिर दूसरे थाने ले जाया गया। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनका फोन भी ले लिया गया, जिससे वह अपने परिजनों और वकीलों से संपर्क नहीं कर सके।

राठी ने इस घटना को लेकर सवाल उठाया कि क्या किसी लोकतांत्रिक देश में किसी व्यक्ति को उसके घर और बेडरूम से इस तरह ले जाना उचित है? उन्होंने अपने परिवार के साथ कथित तौर पर हुए व्यवहार पर भी आपत्ति जताई और कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को अपनी कार्रवाई में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।

‘मेरे पास भारतीय पासपोर्ट है’, नागरिकता को लेकर भी दी सफाई

वीडियो में ध्रुव राठी ने अपना पासपोर्ट दिखाते हुए भारतीय नागरिकता को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं और उन्होंने जर्मनी की नागरिकता नहीं ली है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास कोई विदेशी पासपोर्ट नहीं है।

राठी ने कहा कि भारतीय नागरिक होने के नाते उन्हें भी संविधान के तहत मिलने वाले अधिकार प्राप्त हैं। उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, मार्च और रैलियों में शामिल होना नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपने आसपास मौजूद लोगों की निगरानी में रखा गया था और यह स्थिति उन्हें अनौपचारिक नजरबंदी जैसी लगी। उन्होंने इस कथित कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगाने या उसे अपने साथ ले जाने के लिए संबंधित कानून और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।

CJP प्रोटेस्ट से पहले कार्रवाई, जंतर-मंतर को लेकर क्या कहा?

ध्रुव राठी की हिरासत का मामला CJP के विरोध प्रदर्शन से पहले सामने आया। राठी के अनुसार, उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने से पहले ही घर से ले जाया गया था। उन्होंने दावा किया कि रिहाई के समय उन्हें दोबारा जंतर-मंतर जाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की शक्तियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। किसी भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का आकलन संबंधित कानूनी प्रावधानों, उपलब्ध तथ्यों और अधिकारियों के पक्ष के आधार पर किया जाना जरूरी है।

राठी ने अपने वीडियो में यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो उसे कार्रवाई का आधार और अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी मिलनी चाहिए या नहीं। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने किस कानूनी आधार पर उन्हें अपने साथ लिया और किन परिस्थितियों में रिहा किया, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी जरूरी है।

‘देश में अनऑफिशियल इमरजेंसी जैसे हालात’, ध्रुव राठी का दावा

ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि देश में ऐसी स्थिति बन रही है, जिसे उन्होंने ‘अनऑफिशियल इमरजेंसी’ बताया।

राठी ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेताओं समेत करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने इस कार्रवाई की तुलना आपातकाल जैसी परिस्थितियों से करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात रखने और सरकार की नीतियों का विरोध करने का अवसर मिलना चाहिए। राठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों को इतना भयभीत नहीं किया जाना चाहिए कि उनके मन से डर ही खत्म हो जाए।

ये टिप्पणियां ध्रुव राठी के अपने राजनीतिक विचार और आरोप हैं। हिरासत में लिए गए लोगों की वास्तविक संख्या, कार्रवाई की परिस्थितियों और उससे जुड़े आधिकारिक तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल की चेतावनी का किया जिक्र

ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में सोनम वांगचुक का भी उल्लेख किया। उन्होंने भूख हड़ताल की चेतावनी देने के लिए वांगचुक के प्रति आभार जताया और विरोध की आवाज उठाने के महत्व पर जोर दिया।

राठी के बयान का मुख्य केंद्र नागरिक अधिकार, विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता और सरकारी कार्रवाई की जवाबदेही रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति रखने वाले लोगों की बात सुनी जानी चाहिए।

हालांकि, सोनम वांगचुक की चेतावनी और ध्रुव राठी की हिरासत से जुड़े घटनाक्रम के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। दोनों के बयानों और संबंधित घटनाओं को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर समझना जरूरी है।

क्या कहता है कानून? गिरफ्तारी और हिरासत में प्रक्रिया का महत्व

किसी व्यक्ति को पुलिस द्वारा अपने साथ ले जाने, हिरासत में रखने या गिरफ्तार करने की कार्रवाई का कानूनी आधार होना आवश्यक है। भारतीय कानून में गिरफ्तारी से संबंधित प्रक्रियाएं, व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण बताने और वकील से परामर्श करने जैसे अधिकारों के प्रावधान हैं। हालांकि, किसी विशेष मामले में कौन-से प्रावधान लागू होते हैं, यह कार्रवाई की प्रकृति और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

ध्रुव राठी ने आरोप लगाया है कि उन्हें कार्रवाई का आधार स्पष्ट नहीं किया गया और उन्हें परिवार तथा वकीलों से संपर्क करने का अवसर नहीं मिला। इन आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस का पक्ष, संबंधित रिकॉर्ड और घटना से जुड़े अन्य तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल, उनके वीडियो के जरिए सामने आए दावों ने मामले को चर्चा में ला दिया है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस इस कार्रवाई के बारे में क्या जानकारी देती है और उपलब्ध साक्ष्यों से घटनाक्रम के कौन-से तथ्य प्रमाणित होते हैं।

ध्रुव राठी वीडियो विवाद: अब किन सवालों के जवाब जरूरी?

ध्रुव राठी की रिहाई के बाद उनके वीडियो ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्हें घर से किस कानूनी आधार पर ले जाया गया, क्या उन्हें हिरासत या गिरफ्तारी के कारण बताए गए, उनके परिवार और वकीलों से संपर्क को लेकर क्या व्यवस्था थी और जंतर-मंतर जाने पर कार्रवाई की चेतावनी किन परिस्थितियों में दी गई—इन सभी सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, CJP प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और उनके संबंध में की गई कार्रवाई के आधिकारिक विवरण से भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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