ED अधिकारियों के SC-ST केस में हेमंत सोरेन पक्ष पर हाई कोर्ट सख्त, जवाब में देरी पर ₹10 हजार जुर्माना

Hemant Soren News: झारखंड हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज SC-ST एक्ट से जुड़े मामले में जवाब दाखिल करने में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगने पर प्रतिवादी पक्ष पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को तय की है।

ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती देने का मामला

यह पूरा विवाद उस प्राथमिकी से जुड़ा है, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से रांची के SC-ST थाने में ED के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। इसके बाद ED अधिकारियों ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख करते हुए FIR और SC-ST एक्ट के तहत शुरू हुई कार्रवाई को चुनौती दी और इसे रद्द करने की मांग की।

मामले में ED के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल और अन्य के नाम सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हेमंत सोरेन ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि ED की कार्रवाई के दौरान उन्हें परेशान किया गया और उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

जवाब दाखिल करने में देरी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन पक्ष की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया। अदालत ने समय मांगने और जवाब दाखिल करने में देरी पर नाराजगी जताई। इसके बाद कोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

यह पहली बार नहीं है जब जवाब दाखिल करने में देरी को लेकर अदालत ने जुर्माना लगाया है। अप्रैल 2026 में हुई सुनवाई के दौरान भी जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने पर अदालत ने 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया था और राशि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) में जमा कराने का निर्देश दिया था।

2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने अब मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 2 नवंबर निर्धारित की है। इस सुनवाई में अदालत के सामने मामले से जुड़े पक्षों का जवाब और आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल अदालत ने इस सुनवाई में केवल जवाब दाखिल करने में हुई देरी पर जुर्माना लगाया है; इससे मूल FIR की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

2024 में शुरू हुआ था कानूनी विवाद

इस मामले की शुरुआत जनवरी 2024 में हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 31 जनवरी 2024 को हेमंत सोरेन की ओर से रांची के SC-ST थाने में ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। शिकायत में ED की कार्रवाई को लेकर उत्पीड़न और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।

इसके बाद ED अधिकारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर FIR और SC-ST एक्ट के तहत चल रही कार्रवाई को चुनौती दी। मार्च 2024 में झारखंड हाई कोर्ट ने मामले में संबंधित ED अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कोई coercive action नहीं लेने का निर्देश दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि मामले के शुरुआती चरण में वह आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं दे रही है।

अब आगे क्या होगा?

अब इस कानूनी विवाद में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 2 नवंबर की सुनवाई है। हेमंत सोरेन पक्ष को अदालत के निर्देश के अनुसार अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद हाई कोर्ट मामले से जुड़ी याचिकाओं और दलीलों पर आगे सुनवाई करेगा।

इस मामले को लेकर ED अधिकारियों और हेमंत सोरेन पक्ष के बीच कानूनी विवाद पहले से हाई कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में अगली सुनवाई में अदालत की ओर से दिए जाने वाले निर्देश पर सभी की नजर रहेगी।

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