IITF 2025 में झारखंड पवेलियन का वन विभाग स्टाल बना आकर्षण का केंद्र

IITF 2025 में झारखंड पवेलियन का वन विभाग स्टाल बना आकर्षण का केंद्र


IITF 2025 में झारखंड पवेलियन का वन विभाग स्टाल बना आकर्षण का केंद्र


भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF)–2025 में झारखंड पवेलियन के भीतर स्थापित वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का स्टाल आगंतुकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन गया है। स्टाल पर झारखंड की प्राकृतिक संपदा, वनोपज और जनजातीय जीवनशैली से जुड़े विशिष्ट उत्पादों का शानदार प्रदर्शन किया गया है।

प्राकृतिक उत्पादों ने खींचा ध्यान

झारखंड के वनों में उपलब्ध विशुद्ध प्राकृतिक संसाधनों से बने उत्पाद स्टाल की खास पहचान बन रहे हैं। इनमें शामिल हैं—

  • शुद्ध प्राकृतिक शहद
  • लाह (Lac) से निर्मित शिल्प एवं सजावटी वस्तुएँ
  • रेशम (Tasar, Mulberry, Eri) से बने वस्त्र एवं उत्पाद

इन उत्पादों ने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है, जहाँ लोग झारखंड की जैव–विविधता और पारंपरिक कौशल के अनूठे मेल को करीब से देख और समझ रहे हैं।

झारखंड की वन-समृद्धि की अनूठी झलक

स्टाल में झारखंड के घने वनों, विविध वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को आकर्षक प्रदर्शनी स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।
डिजिटल डिस्प्ले, मॉडल और इन्फोग्राफिक पैनल के माध्यम से—

  • प्रदेश की वन संपदा
  • वन आधारित आजीविका
  • लाह एवं रेशम उत्पादन की प्रक्रिया
  • पर्यावरण संरक्षण की योजनाएँ
    को दर्शाया गया है।

आगंतुकों को यहाँ झारखंड की प्राकृतिक विरासत और वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के जीवन और कौशल की समृद्ध झलक देखने को मिलती है।

आगंतुकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया

IITF में पहुंचे देश–विदेश के आगंतुक झारखंड पवेलियन के इस स्टाल को बेहद सराह रहे हैं।
कई लोग प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता, प्रस्तुति और वनोपज आधारित शिल्पकला को झारखंड की अनूठी पहचान बता रहे हैं।
खरीदारी के साथ-साथ लोग झारखंड के वन संसाधनों और पर्यावरणीय महत्व के बारे में जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं।

झारखंड की वन-परंपरा को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला जैसे वैश्विक मंच पर झारखंड के वन एवं पर्यावरण विभाग की भागीदारी से—
 प्राकृतिक उत्पादों को नई पहचान
 जनजातीय समुदायों की आजीविका को प्रोत्साहन
 राज्य की पर्यावरण–समृद्ध छवि का प्रचार
को बढ़ावा मिला। 

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