रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी का आरोप है कि सरकार ने छात्रों के आंदोलन को शांत कराने के लिए भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया, लेकिन ऐसा आदेश तैयार किया गया जो अदालत की कानूनी कसौटी पर टिक नहीं सका।
मामले में JMM की राज्यसभा सांसद महुआ माजी का एक बयान भी अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। बीजेपी ने महुआ माजी के बयान को आधार बनाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय सरकार पर बने दबाव के बाद लिया गया था।
हाईकोर्ट की रोक के बाद बीजेपी का सरकार पर हमला
JPSC और JSSC से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले पर हाईकोर्ट की ओर से अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने बिना पर्याप्त कानूनी तैयारी के ऐसा फैसला लिया, जिसके कारण पूरा मामला अदालत तक पहुंच गया।
बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन को खत्म करने के उद्देश्य से परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। पार्टी का दावा है कि सरकार को पहले से अंदाजा था कि मामला अदालत में चुनौती दिया जा सकता है, इसके बावजूद कानूनी पक्ष को मजबूती से नहीं रखा गया।
महुआ माजी के बयान को बीजेपी ने बनाया मुद्दा
बीजेपी ने JMM सांसद महुआ माजी के एक वीडियो को शेयर करते हुए उनके बयान को सरकार के खिलाफ बड़ा आधार बनाया। महुआ माजी के बयान के मुताबिक, सरकार पर दबाव बनाया गया था, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया।
बीजेपी ने इसी बयान को लेकर सवाल उठाया कि अगर सरकार पर परीक्षा रद्द करने के लिए दबाव था और उसे पहले से पता था कि मामला अदालत में जा सकता है, तो फिर सरकार ने कानूनी स्तर पर अपनी तैयारी मजबूत क्यों नहीं की।
पार्टी ने आरोप लगाया कि महुआ माजी के बयान से सरकार के फैसले को लेकर उठ रहे सवाल और गंभीर हो गए हैं। बीजेपी का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले में सरकार को पारदर्शी तरीके से पूरे घटनाक्रम की जानकारी सामने रखनी चाहिए।
सरकारी वकीलों की दलीलों पर भी बीजेपी ने उठाए सवाल
बीजेपी ने आरोप लगाया कि JPSC-JSSC मामले में सरकार की ओर से अदालत के सामने पर्याप्त मजबूती से पक्ष नहीं रखा गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार को परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पूरा भरोसा था, तो उसे अदालत में अपने निर्णय के समर्थन में ठोस कानूनी आधार प्रस्तुत करना चाहिए था।
बीजेपी ने इसे छात्रों के साथ छल बताते हुए कहा कि युवा लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हाईकोर्ट की रोक के बाद पूरा मामला फिर कानूनी पेंच में उलझ गया है।
BJP बोली- छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करे सरकार
झारखंड बीजेपी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य के युवाओं को राजनीतिक फैसलों के बीच नहीं फंसाया जाना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के लिए छात्रों के सामने ऐसा फैसला रखा, जिसके बाद अब अदालत की प्रक्रिया में मामला अटक गया है।
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से जांच रिपोर्ट और न्यायिक कार्यवाही में मामले के सभी तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। पार्टी का दावा है कि अदालत में कमजोर पक्ष रखने के कारण सरकार की मुश्किलें बढ़ी हैं।
JPSC-JSSC विवाद में CBI जांच का मुद्दा भी उठा
इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी ने एक बार फिर CBI जांच की मांग को लेकर सरकार को घेरा है। पार्टी का आरोप है कि सरकार पूरे मामले की स्वतंत्र जांच से बचने की कोशिश कर रही है और इसी वजह से भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का रास्ता अपनाया गया।
बीजेपी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार का फैसला पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत था, तो उसे जांच और अदालत की प्रक्रिया को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। हालांकि, बीजेपी के इन आरोपों पर सरकार का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आगे क्या?
हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। अब इस मामले में अदालत के अगले आदेश और राज्य सरकार की ओर से रखे जाने वाले पक्ष पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।
JPSC-JSSC विवाद पहले से ही झारखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। एक तरफ अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष सरकार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया और उसकी कानूनी तैयारी को लेकर सवाल उठा रहा है। महुआ माजी के बयान के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
फिलहाल, हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और अदालत के सामने अपने निर्णय का मजबूत कानूनी पक्ष रखने की है। वहीं बीजेपी इस पूरे मामले को युवाओं और रोजगार के मुद्दे से जोड़कर सरकार पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
