Kanpur Dehat News: अमन की मौत पर 18 घंटे से सड़क जाम, शव रखकर धरने पर परिजन; CM योगी को मौके पर बुलाने की मांग से बढ़ा तनाव

कपड़ा व्यापारी की संदिग्ध मौत के बाद गजनेर में बवाल, हत्या का आरोप लगाकर प्रदर्शन; पुलिस पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप

Kanpur Dehat News: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में 24 वर्षीय कपड़ा व्यापारी अमन सिंह भदौरिया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मामला गंभीर होता जा रहा है। अमन की मौत को लेकर परिजन और ग्रामीण इसे सड़क हादसा मानने को तैयार नहीं हैं और हत्या की आशंका जताते हुए लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

गजनेर थाना क्षेत्र में आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने जीठरौली तिराहे पर अमन का शव सड़क पर रखकर मूसानगर-रायपुर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे करीब 18 घंटे से सड़क पर बैठे हैं और जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।

मौके पर प्रदर्शनकारियों ने टेंट भी लगा लिया है। पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लोग दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के चलते इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

अमन की मौत के बाद परिजनों का फूटा गुस्सा

जानकारी के मुताबिक, गंगागंज निवासी अमन सिंह भदौरिया सरवनखेड़ा में कपड़े की दुकान चलाते थे। मंगलवार रात दुकान बंद करने के बाद वह बाइक से अपने घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान रायपुर रोड पर तड़वरा मोड़ के पास वह घायल अवस्था में सड़क किनारे मिले।

अमन के पास ही उनकी बाइक भी पड़ी थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन देर रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

अमन की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। इसके बाद परिजनों ने घटना को महज सड़क दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया और हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।

सिर पर चोट के निशान को लेकर उठे सवाल

परिजनों का दावा है कि अमन के सिर पर चोट के निशान थे। इसी आधार पर परिवार हत्या की आशंका जता रहा है। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले अमन का विवाद भी हुआ था और इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत की गई थी।

परिजनों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। परिवार का कहना है कि यदि पहले की शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती तो शायद मामला यहां तक नहीं पहुंचता।

हालांकि, पुलिस की ओर से फिलहाल अमन की मौत को सड़क दुर्घटना बताया जा रहा है। ऐसे में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष इस मामले में बेहद अहम माने जा रहे हैं।

परिजनों का आरोप- मुकदमा दर्ज कराने पर SC-ST एक्ट में फंसाने की धमकी

अमन के परिजनों ने पुलिस-प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी शिकायत को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के माध्यम से एसपी को फोन भी करवाया था। इसके अलावा परिजनों ने खुद एसपी से मुलाकात करने का दावा किया है।

परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इतना ही नहीं, परिजनों का दावा है कि मुकदमा दर्ज कराने की कोशिश करने पर उन्हें एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी गई और दबाव बनाकर समझौता करा दिया गया।

इन आरोपों के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और बढ़ गया है। परिवार अब संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

एसपी, सीओ, एसएचओ और चौकी प्रभारी पर कार्रवाई की मांग

प्रदर्शन कर रहे परिजन और ग्रामीण एसपी, सीओ, एसएचओ तथा चौकी प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले में पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मौके पर पहुंचने की भी मांग रखी है। इसके अलावा परिजनों की ओर से एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की गई है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनकी मांगों में आरोपियों के एनकाउंटर की बात भी शामिल है। इन मांगों के चलते प्रशासन के सामने प्रदर्शनकारियों को समझाने और स्थिति को नियंत्रित करने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

18 घंटे से सड़क पर शव, मौके पर भारी पुलिस बल

जाम और प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद सीओ सदर संजय सिंह समेत कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल के साथ फायर विभाग की गाड़ियां भी तैनात की गई हैं।

पुलिस अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों और परिजनों से बातचीत कर रहे हैं। एडिशनल एसपी आलोक प्रसाद भी मौके पर पहुंचकर जमीन पर बैठकर परिजनों को समझाने का प्रयास करते नजर आए।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जिलाधिकारी और एसपी खुद मौके पर नहीं पहुंचे। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उच्च स्तर से आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने पर क्यों अड़े हैं परिजन?

अमन के परिवार की सबसे प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मौके पर आना शामिल है। परिजनों का कहना है कि उन्हें स्थानीय स्तर की कार्रवाई पर भरोसा नहीं है और वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री स्वयं मौके पर आकर उनकी बात सुनें।

इसके साथ ही परिवार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, एक करोड़ रुपये मुआवजा और संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग कर रहा है।

यही वजह है कि शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन लगातार जारी है और मूसानगर-रायपुर मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित है।

पुलिस का दावा- सड़क हादसे में हुई अमन की मौत

इस पूरे मामले पर कानपुर देहात की एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडे ने पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा कि 4 सितंबर को दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था।

एसपी के मुताबिक, अमन की मौत सड़क दुर्घटना में हुई है। वहीं दूसरी तरफ परिजन इसे हत्या बता रहे हैं। ऐसे में पुलिस और परिवार के दावों में स्पष्ट अंतर सामने आ रहा है।

एसपी ने कहा कि फिलहाल परिजनों से बातचीत की जा रही है और मामले की जांच जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज

अमन की मौत हादसा थी या फिर इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश थी, इसका जवाब जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को देखते हुए मामले की जांच कर रही है।

एसपी ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की सभी मांगों को फिलहाल पूरा नहीं किया जा सकता है। पुलिस लगातार परिवार से बातचीत कर रही है ताकि स्थिति को सामान्य किया जा सके।

फिलहाल गजनेर में अमन की मौत को लेकर तनाव बना हुआ है। एक तरफ परिवार और ग्रामीण हत्या की आशंका जताकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस इसे सड़क दुर्घटना बता रही है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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