Toll Plaza New Rule: राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए टोल व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भारत मार्च 2027 तक AI आधारित बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और टोल वसूली की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और डिजिटल हो जाएगी।
गडकरी ने यह घोषणा Global Fintech Fest 2026 में की। उन्होंने कहा कि भारत टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने वाली पुरानी व्यवस्था को खत्म कर एक ऐसी प्रणाली की ओर बढ़ रहा है, जिसमें तकनीक की मदद से वाहन बिना बाधा के आगे निकल सकेंगे। सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से टोल कलेक्शन में पारदर्शिता बढ़ेगी और सालाना टोल राजस्व में करीब 10,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हो सकती है।
मार्च 2027 तक शुरू हो सकती है AI आधारित टोलिंग व्यवस्था
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक नई AI आधारित और सीमलेस टोलिंग प्रणाली को फरवरी-मार्च 2027 तक लागू किए जाने की उम्मीद है। इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान के लिए वाहनों को मौजूदा टोल बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी।
गडकरी ने कहा कि भविष्य का भारतीय हाईवे इंटेलिजेंट, बाधा-मुक्त और पूरी तरह कैशलेस होगा। AI और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से टोल वसूली को अधिक सहज बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
ANPR और FASTag मिलकर करेंगे टोल वसूली को आसान
नई व्यवस्था में Automatic Number Plate Recognition यानी ANPR तकनीक को FASTag के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा। इसके जरिए वाहन की नंबर प्लेट की पहचान और FASTag से जुड़े भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ा जाएगा।
इस तकनीक का उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने और लंबी कतारों की समस्या को कम करना है। वाहन चालक बिना लंबे इंतजार के टोल प्लाजा से आगे निकल सकेंगे और टोल की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी होगी।
FASTag ने पहले ही कम किया है इंतजार का समय
भारत में FASTag के इस्तेमाल ने टोल प्लाजा पर लगने वाले समय को पहले ही काफी कम किया है। नितिन गडकरी ने बताया कि FASTag को 2014 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था और वर्ष 2021 में इसे अनिवार्य कर दिया गया।
आज देश में 98 प्रतिशत से ज्यादा वाहनों में FASTag का इस्तेमाल हो रहा है। अब तक 13 करोड़ से अधिक FASTag जारी किए जा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार FASTag की वजह से टोल प्लाजा पर पहले लगने वाला करीब 12 से 30 मिनट का इंतजार 80 से 90 प्रतिशत तक कम हुआ है।
अब सरकार इसी डिजिटल व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है, ताकि टोल प्लाजा पर वाहन रोकने की जरूरत ही न रहे।
सालाना टोल राजस्व में 10 हजार करोड़ रुपये बढ़ने का अनुमान
बैरियर-फ्री डिजिटल टोलिंग सिस्टम से केवल वाहन चालकों का समय बचाने की उम्मीद नहीं है, बल्कि सरकार को टोल संग्रह में भी फायदा होने का अनुमान है। सरकार के मुताबिक नई व्यवस्था में टोल कलेक्शन अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित होगा।
इसी वजह से सालाना टोल राजस्व में करीब 10,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। नई व्यवस्था से हाईवे पर ट्रैफिक फ्लो बेहतर होने और टोल प्लाजा पर भीड़ कम होने की उम्मीद है।
OneTag से बैंक बदलना होगा आसान
टोल व्यवस्था में सिर्फ बैरियर-फ्री सिस्टम ही बदलाव नहीं है। FASTag यूजर्स के लिए सरकार ने OneTag नाम की नई सुविधा भी पेश की है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में नितिन गडकरी ने इस सुविधा को लॉन्च किया।
OneTag की मदद से FASTag यूजर्स को बैंक बदलने के लिए नया FASTag लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी अगर कोई वाहन मालिक अपने मौजूदा FASTag से जुड़े बैंक को बदलना चाहता है, तो उसे पुराना FASTag हटाकर नया टैग खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी।
पुराना FASTag हटाए बिना बैंक कर सकेंगे पोर्ट
नई OneTag सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वाहन चालक अपने मौजूदा FASTag को बरकरार रखते हुए बैंक बदल सकेंगे। इसके लिए वाहन से पुराने टैग को हटाने या नया टैग खरीदने की जरूरत नहीं होगी।
इससे FASTag उपयोगकर्ताओं के लिए बैंक बदलने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान और सुविधाजनक हो सकती है। सरकार डिजिटल टोलिंग को ज्यादा सरल बनाने के साथ-साथ FASTag से जुड़े यूजर अनुभव को भी बेहतर करने की दिशा में काम कर रही है।
भारत में बदलने जा रही है Toll Plaza की तस्वीर
AI, ANPR और FASTag जैसी तकनीकों के एकीकरण के साथ भारत की टोल व्यवस्था अब अगले चरण में पहुंचने की तैयारी में है। अगर मार्च 2027 तक प्रस्तावित बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम लागू होता है, तो वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुककर भुगतान करने की मौजूदा व्यवस्था से बड़ी राहत मिल सकती है।
सरकार का लक्ष्य ऐसा हाईवे नेटवर्क तैयार करना है, जहां वाहन बिना बाधा आगे बढ़ें, टोल भुगतान डिजिटल तरीके से हो और पूरी प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और कैशलेस बने। आने वाले समय में यह बदलाव देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के अनुभव को काफी बदल सकता है।
