Ranchi News Today: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रांची स्थित आड्रे हाउस में डॉ. राजश्री जयंती द्वारा लिखित पुस्तक ‘नरेंद्र मोदी: आधुनिक भारत के शिल्पकार’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने लेखिका को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, कार्यशैली, दूरदर्शी सोच और देश के विकास के प्रति उनके समर्पण पर अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में आत्मनिर्भर भारत, आधुनिक तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।**
आड्रे हाउस में पुस्तक का विमोचन, राज्यपाल ने लेखिका को दी बधाई
रांची के आड्रे हाउस में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने डॉ. राजश्री जयंती की पुस्तक ‘नरेंद्र मोदी: आधुनिक भारत के शिल्पकार’ का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने लेखिका को उनकी रचना के लिए शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह पुस्तक अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचेगी।
राज्यपाल ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उनके साथ काम कर चुके हैं। इस दौरान उन्हें प्रधानमंत्री की कार्यशैली, दूरदर्शी सोच, निर्णय लेने की क्षमता और देश के विकास के प्रति उनके समर्पण को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि किसी सार्वजनिक नेतृत्व को समझने के लिए उसके विचारों, फैसलों और देश के विकास के प्रति दृष्टिकोण को जानना महत्वपूर्ण है। पुस्तक में समकालीन भारत के विभिन्न पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
आम परिवार से प्रधानमंत्री तक का सफर, मेहनत और अनुशासन की मिसाल
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक सामान्य परिवार से देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचने का उनका सफर कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक मिसाल है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत नागरिक ही एक समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देश की प्रगति केवल सरकारी योजनाओं या आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों की क्षमता, जिम्मेदारी, नए विचारों और समाज के प्रति योगदान का भी अहम स्थान है।
राज्यपाल के अनुसार, भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों को सशक्त बनाना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी सोच के तहत आत्मनिर्भरता, नवाचार, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय सुरक्षा और आधुनिक तकनीक जैसे विषयों को महत्वपूर्ण माना गया है।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर
कार्यक्रम के दौरान विकसित भारत 2047 के संकल्प का भी उल्लेख किया गया। पुस्तक में भारत की विकास यात्रा और भविष्य की संभावनाओं को समकालीन विषयों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है।
राज्यपाल ने कहा कि आत्मनिर्भरता और नए विचार देश की आर्थिक तथा तकनीकी प्रगति की मजबूत बुनियाद हैं। भारत को भविष्य में और अधिक सक्षम बनाने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करना जरूरी है, जिनसे देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ वैश्विक स्तर पर भी अपनी भूमिका मजबूत कर सके।
उन्होंने युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने और नए विचारों को प्रोत्साहन देने की जरूरत पर जोर दिया। युवाओं को उचित अवसर मिलने से नए उद्योगों की स्थापना, रोजगार के अवसरों का विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
युवा प्रतिभा, नए उद्योग और रोजगार के अवसरों पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। युवाओं की क्षमता, रचनात्मक सोच और तकनीकी कौशल को प्रोत्साहित करके देश में नए उद्योगों और रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सकता है।
भारत के विकास के लिए जरूरी है कि युवा केवल रोजगार पाने तक सीमित न रहें, बल्कि नए विचारों और उद्यमशीलता के माध्यम से रोजगार सृजन में भी योगदान दें। नवाचार को बढ़ावा देने से आर्थिक विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं और देश की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत किया जा सकता है।
इस संदर्भ में आत्मनिर्भरता को आर्थिक और तकनीकी प्रगति से जोड़ते हुए देश में नई संभावनाएं विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
सांस्कृतिक विरासत के साथ विज्ञान और तकनीक में आगे बढ़ने की जरूरत
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास की दिशा में आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहना जरूरी है।
उनके अनुसार, भारत के लिए विज्ञान, तकनीक और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में लगातार प्रगति करना आवश्यक है। सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक ज्ञान के बीच संतुलन बनाए रखते हुए देश अपनी विशिष्ट पहचान को कायम रख सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका का विस्तार कर सकता है।
आज के दौर में तकनीकी विकास केवल आर्थिक समृद्धि का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान और राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सेमीकंडक्टर तकनीक क्यों हैं महत्वपूर्ण?
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा और सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रगति की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। राज्यपाल ने कहा कि इन क्षेत्रों में भारत की क्षमता मजबूत होने से देश की रणनीतिक और तकनीकी स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
सेमीकंडक्टर तकनीक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार उपकरणों, कंप्यूटर, औद्योगिक मशीनों और कई अन्य तकनीकी प्रणालियों का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे क्षेत्रों में प्रगति भारत के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।
वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाना भी विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अहम माना जाता है। आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारत अपनी क्षमताओं का विस्तार कर सकता है।
पुस्तक की सफलता पाठकों को सोचने और चर्चा करने के लिए प्रेरित करना: राज्यपाल
पुस्तक विमोचन समारोह में राज्यपाल ने साहित्य की भूमिका पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी पुस्तक की वास्तविक सफलता इस बात में है कि वह पाठकों को सोचने, समझने और सकारात्मक चर्चा करने के लिए प्रेरित करे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि डॉ. राजश्री जयंती की पुस्तक ‘नरेंद्र मोदी: आधुनिक भारत के शिल्पकार’ व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचेगी। साथ ही, यह पुस्तक आज के भारत के विभिन्न पहलुओं, देश की विकास यात्रा और भविष्य की चुनौतियों को समझने में पाठकों के लिए उपयोगी साबित होगी।
भारत के विकास और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रही चर्चा
रांची के आड्रे हाउस में आयोजित इस पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और नेतृत्व से लेकर आत्मनिर्भरता, युवाओं की भूमिका, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय सुरक्षा और आधुनिक तकनीक तक कई महत्वपूर्ण विषय सामने आए।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के संबोधन में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों की भागीदारी, नवाचार, तकनीकी क्षमता और आर्थिक विकास की अहमियत रेखांकित की गई।
डॉ. राजश्री जयंती की पुस्तक इसी व्यापक संदर्भ में समकालीन भारत के विभिन्न पहलुओं को पाठकों के सामने रखने का प्रयास करती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुस्तक पाठकों के बीच किस तरह की चर्चा को आगे बढ़ाती है और भारत की विकास यात्रा को समझने में किस प्रकार योगदान देती है।
