मिथिला से राइजिंग स्टार तक का सफ़र तय कर चुकी मैथिली ठाकुर का सफ़रनाम

पटना: मिथिला के गर्भ से अनेक विभूतियां निकली हैं जो इतिहास के पन्नों पर अंकित हैं। कविकोकिल विद्यापति से लेकर शारदा सिन्हा तक न जाने कितनी विभूतियों को जन्म दिया है माँ सीता की धरती मिथिला ने। कवि, कथाकार, नाटककार, अभिनेता, संगीतकार, गीतकार, गायक और मिथिला पेंटिंग जैसे और कई क्षेत्र में मिथिला की प्रतिभा जगजाहिर है। बताना जरूरी है की इसी मिथिला की भूमि से एक और नई प्रतिभा चमक रही है “मैथिली ठाकुर”। मैथिली ठाकुर ने छोटी उम्र में ही संगीत की दुनिया में अपना नाम स्थापित कर चुकी है और मिथिला से लेकर बॉलीवुड के बड़े-बड़े संगीतकारों के दिल में अपना जगह बना लिया है।  प्रस्तुत है उभरती स्वरकोकिला मैथिली ठाकुर  से बातचीत की कुछ खास अंश…

स्वराजः मैथिली आप अपने बारे में संगीत प्रेमियों को संक्षिप्त में बताएं।

मैथिलीः मैं मूल रूप से मिथिला के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड के उरेण गांव से हूं। मेरे पिता रमेश ठाकुर दिल्ली में संगीत शिक्षक हैं । मैं अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हूं ।

स्वराजः आप किस उम्र से गीत गाती हैं और ये कला आपने कहां से सीखा ?

मैं जब पांच साल की थी तभी से गायन में स्टेज शो करती आ रही हूं । ये प्रेरणा मेरे पापा से मिली है । जबसे बोलना सीखा तबसे ही अपने पापा से संगीत की पारम्परिक शिक्षा ग्रहण करना शुरू कर दी ।

स्वराजः आपने अभी तक कहां-कहां परफॉर्म किया है ?

मैथिलीः मेरा पहला शो दिल्ली से शुरू हुआ जब मैं पांच साल की थी। वहां मैंनें क्लासिकल से शुरू की थी, और लगातार पांच साल तक क्लासिकल में टॉप करती रही। दस साल की उम्र में जी टीवी के लिटिल चैम्प में टॉप थर्टी, 2015 के इंडियन आइडिओल में टॉप टेन रही ।2017 के राइजिंग स्टार के फाइनल में द्वितीय विजेता का खिताब पाकर अपने मिथिला और मेरे गुरु पिताश्री का नाम रोशन करने की कोशिश की ।

स्वराजः राइजिंग स्टार के फाइनल में आपने प्रथम स्थान नहीं पाया। क्या इसका कोई गम नहीं खला ?

मैथिलीः देखिये इतना बड़ा प्लेटफॉर्म मुझे मिला और आॅडिशन से लेकर फाइनल तक दर्शकों का जितना प्यार मिला उसके खुशी में इसके गम की परछाई भी कहां फटकती मेरे आत्मबल के समक्ष । इसलिये मैं अंत तक हंसती रही और यही मेरी यू एसपीभी रही ।

स्वराजः आप अपने जैसे दूसरे प्रतिभावान संगीत मित्रों को कुछ सलाह या अनुभव शेयर करना चाहेंगी

मैथिलीः बिल्कुल यही कहूंगी की झोंका कितना भी हो हवा का परेशानी कितनी भी हो जिंदगी में अपने तल यानी आत्मविश्वास को बरकरार रखें । सीखने की कोई उम्र नहीं होती । आप जितना अपने को तरासेंगे उतनी ही चमक बढेगी । गायन के लिये रियाज बहुत जरूरी है दोस्तों ।

 स्वराजः आप किस तरह का  गाना पसंद करती हैं ?

मैथिलीः हमने सीखना शुरू किया पहले  फोक से, खासकर मिथिला के पारम्परिक और संस्कार गीतों से, फिर क्लासिकल म्यूजिक और अब तो हर तरह के गानों को गाना चाहते हैं।

By: Amalesh Anand

Share:
Copied!