रामपुरहाट। पश्चिम बंगाल की राजनीति से रविवार को एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई। राज्य विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में मिला। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उनका शव कार्यालय के भीतर फंदे से लटका हुआ पाया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या यह आत्महत्या का मामला है।
मामले में एक पृष्ठ का कथित सुसाइड नोट भी सामने आया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित इस पत्र की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अब कथित पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
पार्टी कार्यालय में मिला शव, पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रविवार सुबह रामपुरहाट स्थित TMC कार्यालय में आशीष बनर्जी का शव फंदे से लटका मिला। बताया जा रहा है कि यह कार्यालय उनके आवास के पास ही स्थित है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे घटनास्थल की जांच की।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले अन्य तथ्यों से मौत की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।
कथित सुसाइड नोट में क्या है?
मामले में सोशल मीडिया पर एक कथित सुसाइड नोट भी प्रसारित हो रहा है। इस पत्र में कथित तौर पर लिखा गया है कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। पत्र में राजनीति में आने को लेकर अफसोस जताने का भी दावा किया गया है।
कथित पत्र में आशीष बनर्जी के नाम से यह भी लिखा बताया जा रहा है कि वह भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे और किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए। पत्र में पार्टी के भीतर कथित तौर पर होने वाले कुछ ‘गलत कार्यों’ को स्वीकार नहीं कर पाने का उल्लेख भी बताया जा रहा है।
हालांकि, इन दावों की पुष्टि अभी पुलिस या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की ओर से नहीं हुई है। इसलिए कथित सुसाइड नोट में लिखी बातों को फिलहाल जांच का हिस्सा माना जा रहा है, न कि स्थापित तथ्य।
TRDA को लेकर भी कथित पत्र में बड़ा दावा
कथित पत्र में तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण यानी TRDA का भी जिक्र होने की बात कही जा रही है। इसमें कथित तौर पर दावा किया गया है कि प्राधिकरण की निविदाओं से जुड़े फैसलों, चेक जारी करने, योजनाओं को मंजूरी देने या अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने में आशीष बनर्जी की कोई भूमिका नहीं थी।
कथित पत्र में यह भी आरोप लगाया गया बताया जा रहा है कि उन्हें बदनाम और अपमानित करने की कोशिश की गई। इसके साथ ही राजनीति में आने को अपनी भूल मानने की बात भी पत्र में होने का दावा किया जा रहा है।
इन तमाम दावों की वास्तविकता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
परिवार और विद्यार्थियों का भी कथित पत्र में जिक्र
कथित सुसाइड नोट में परिवार के सदस्यों को राजनीति में नहीं आने की सलाह देने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा अपने विद्यार्थियों से मिले स्नेह को याद करने का उल्लेख होने का दावा किया जा रहा है।
आशीष बनर्जी का राजनीति से जुड़ाव छात्र जीवन से ही रहा था। राजनीति के साथ उन्होंने शिक्षक के तौर पर भी काम किया था। लंबे राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने रामपुरहाट क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
2001 से रामपुरहाट सीट का प्रतिनिधित्व
आशीष बनर्जी वर्ष 2001 से 2026 तक रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। अपने राजनीतिक सफर में वह पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने स्कूली शिक्षा और कृषि समेत कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी।
बीरभूम की राजनीति में भी उनका प्रभाव माना जाता था। तृणमूल कांग्रेस के नेता अनुब्रत मंडल के जिलाध्यक्ष रहने के दौर में आशीष बनर्जी जिले के प्रमुख पार्टी नेताओं में शामिल रहे।
2026 विधानसभा चुनाव में मिली थी हार
आशीष बनर्जी ने 2026 का विधानसभा चुनाव भी रामपुरहाट सीट से TMC के टिकट पर लड़ा था। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें बीजेपी के ध्रुव साहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह 24 हजार से अधिक मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव में हार के बाद वह पहले की तुलना में राजनीतिक गतिविधियों में कम सक्रिय नजर आ रहे थे। हालांकि, उनकी मौत और चुनावी हार के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं, इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।
बदले राजनीतिक माहौल के बीच हुई मौत
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 का विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण रहा। लंबे समय तक TMC के शासन के बाद राज्य की सत्ता में बदलाव हुआ और बीजेपी ने सरकार बनाई। इसके बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं।
इसी बदले राजनीतिक माहौल के बीच TMC के कई पूर्व नेताओं और विधायकों को भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा है। ऐसे समय में आशीष बनर्जी की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनकी मौत का इन राजनीतिक परिस्थितियों से कोई संबंध था।
पुलिस के सामने कई सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आशीष बनर्जी की मौत वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई। घटनास्थल से मिले साक्ष्य, कथित सुसाइड नोट, मोबाइल फोन और अन्य संभावित डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
सबसे अहम जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आने की उम्मीद है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति थी।
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कथित सुसाइड नोट की प्रामाणिकता की भी जांच की जाएगी। इसलिए जांच पूरी होने से पहले मौत के कारण या किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
आशीष बनर्जी की मौत से TMC में भी हलचल
आशीष बनर्जी लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में रहे और बीरभूम की राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके नेता की इस तरह मौत की खबर से राजनीतिक हलकों में भी हलचल है।
अब निगाहें पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कथित सुसाइड नोट की सत्यता पर टिकी हैं। इन जांचों के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि रामपुरहाट के TMC कार्यालय में आशीष बनर्जी की मौत के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।
