पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों उठापटक तेज होती नजर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती नाराजगी और बगावत की खबरों के बीच रविवार, 14 जून को वरिष्ठ भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी दिल्ली पहुंचने वाले हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे पार्टी के असंतुष्ट और बागी सांसदों से अहम बैठक करेंगे।
इस बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगले ही दिन कुछ सांसद लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर अलग संसदीय समूह या ब्लॉक की मांग रख सकते हैं। ऐसे में दिल्ली में होने वाली यह बैठक पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकती है।
TMC के भीतर बढ़ा असंतोष, सियासी समीकरण बदलने के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी झटकों के बाद टीएमसी के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति अब खुलकर सामने आने लगी है।
कहा जा रहा है कि कुछ सांसद वर्तमान नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की रणनीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि बागी खेमे की गतिविधियां लगातार तेज होती दिखाई दे रही हैं।
स्पीकर से मुलाकात से पहले होगी अहम रणनीतिक बैठक
जानकारी के अनुसार, बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी राजनीतिक स्थिति और संसदीय पहचान को लेकर चर्चा कर सकते हैं। इससे पहले रविवार को शुभेंदु अधिकारी के साथ प्रस्तावित बैठक को रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि सांसदों का एक बड़ा समूह अलग रास्ता चुनता है तो इसका असर न केवल संसद में टीएमसी की ताकत पर पड़ेगा, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी नए समीकरण बन सकते हैं।
जगदीश बासुनिया ने की मुलाकात की पुष्टि
बागी खेमे से जुड़े सांसद जगदीश बासुनिया ने पुष्टि करते हुए कहा कि शुभेंदु अधिकारी रविवार को दिल्ली पहुंचेंगे और सांसदों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि स्पीकर से प्रस्तावित मुलाकात से पहले यह बैठक महत्वपूर्ण रहने वाली है।
बासुनिया ने यह भी कहा कि राजनीति में संभावनाओं के दरवाजे कभी बंद नहीं होते। साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि सांसद किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सोच और परिस्थितियों के आधार पर निर्णय ले रहे हैं।
किन नेताओं के नाम चर्चा में?
राजनीतिक चर्चाओं में जिन नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं उनमें काकोली घोष दस्तिदार, सताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, जून मालिया, प्रसून बनर्जी और शर्मिला सरकार जैसे सांसद शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन नेताओं समेत कई सांसद संसदीय स्तर पर अलग पहचान की मांग को लेकर सक्रिय हैं।
यदि इन सांसदों की मांग को मंजूरी मिलती है तो संसद में टीएमसी की राजनीतिक स्थिति पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
ममता खेमे की बढ़ी चिंता
दूसरी ओर, टीएमसी के वफादार नेताओं ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताई है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि असंतुष्ट नेताओं को पहले पार्टी से इस्तीफा देना चाहिए। वहीं बागी खेमे का दावा है कि वे पार्टी की मूल विचारधारा के पक्ष में खड़े हैं और नेतृत्व की नीतियों से असहमति जता रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह नाराजगी केवल दबाव की राजनीति है या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
