धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक का बड़ा बयान, बोले- ‘सिर्फ इस्तीफा नहीं, सिस्टम में सुधार जरूरी, वरना कोई मतलब नहीं’

नीट पेपर लीक मामले को लेकर लंबे समय तक चले आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद राजघाट पहुंचे वांगचुक ने कहा कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था और पूरे सिस्टम में ठोस सुधार होना चाहिए। उनका कहना था कि यदि सुधार नहीं हुआ तो इस्तीफे का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

‘इस्तीफा सिर्फ शुरुआत है, असली बदलाव अभी बाकी’

मीडिया से बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अब परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी समस्या को स्वीकार करना पहला कदम होता है, लेकिन उसके बाद प्रभावी इलाज भी जरूरी है। उनके अनुसार यदि व्यवस्था में सुधार लागू किए जाते हैं तो देश के लिए यह एक सकारात्मक बदलाव साबित होगा।

उन्होंने कहा कि इस्तीफा एक नई शुरुआत है और अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए क्या कदम उठाती है।

परीक्षा संशोधन विधेयक पर भी दी प्रतिक्रिया

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर भी सोनम वांगचुक ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कानून बनाना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन ऐसे किसी भी विधेयक पर व्यापक चर्चा और गंभीर विचार-विमर्श होना चाहिए ताकि भविष्य में प्रभावी और संतुलित व्यवस्था तैयार की जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

लोकसभा में पेश हुआ एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक

इसी बीच केंद्र सरकार ने प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर सख्ती बढ़ाने के उद्देश्य से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कड़े प्रावधान लागू करना बताया जा रहा है।

26 दिन के अनशन के बाद अस्पताल से मिली छुट्टी

सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। उन्होंने 24 जुलाई को 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया। एनडीए सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन तोड़ा। उपचार के बाद सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

इस्तीफे को बताया लोकतंत्र की जीत

इससे पहले सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत बताया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह शांति, धैर्य और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है। उन्होंने आंदोलन से जुड़े छात्रों, युवाओं और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देशभर से उठी आवाज ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

36 दिनों तक चला आंदोलन बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चला यह आंदोलन करीब 36 दिनों तक चर्चा का केंद्र बना रहा। आंदोलन के दौरान दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रणाली में सुधार के साथ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। आंदोलन समाप्त होने के बाद अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में किए जाने वाले संभावित सुधारों पर टिकी हैं।

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