अस्पताल से सोनम वांगचुक का सरकार को भावुक पत्र, अनशन खत्म करने की जताई इच्छा, लेकिन रखीं ये अहम शर्तें

नई दिल्ली : शिक्षा व्यवस्था और नीट पेपर लीक से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पैरोकार सोनम वांगचुक ने अस्पताल से केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने साफ किया है कि वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन देने होंगे। वांगचुक ने कहा कि यह आंदोलन केवल उनका व्यक्तिगत संघर्ष नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग से जुड़ा हुआ है।

केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात का किया जिक्र

अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने दोनों नेताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि बातचीत के दौरान सरकार की ओर से कई मुद्दों पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया गया।

वांगचुक के अनुसार चर्चा में उन छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की बात भी शामिल रही, जिन्होंने कथित तौर पर पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या की। इसके साथ ही संसद में इस पूरे मामले पर सार्थक चर्चा और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी बातचीत हुई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार किए जाने की बात भी चर्चा का हिस्सा रही।

‘चलो संसद’ मार्च को बताया शांतिपूर्ण

सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उनका कहना है कि पुलिस की ओर से बल प्रयोग और सख्ती के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने संयम बनाए रखा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी।

उन्होंने लिखा कि देश और दुनिया ने युवाओं के धैर्य, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखा। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या प्रतिशोधात्मक कदम नहीं उठाए जाएंगे, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है।

65 सांसदों की अपील का भी किया जिक्र

पत्र में वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। कई सांसद अस्पताल पहुंचकर उनसे मिले, जबकि कुछ अन्य नेताओं के भी मिलने की उम्मीद उन्होंने जताई।

उन्होंने लिखा कि सभी सांसदों ने उन्हें याद दिलाया कि देश और शिक्षा व्यवस्था के लिए उन्हें आगे भी बहुत काम करना है। वांगचुक ने स्वीकार किया कि वह इस भावना से सहमत हैं और भविष्य में भी समाज तथा छात्रों के लिए काम जारी रखना चाहते हैं।

“मैं जीना चाहता हूं, छात्रों के बीच लौटना चाहता हूं”

अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने भावुक शब्दों में लिखा कि वह जीवित रहना चाहते हैं और अपने छात्रों, शिक्षा तथा उन कार्यों के बीच वापस लौटना चाहते हैं, जिन्होंने उनके जीवन को उद्देश्य दिया है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ऐसा उन युवाओं की कीमत पर नहीं कर सकते, जिनके हितों और भविष्य की रक्षा के लिए यह आंदोलन शुरू किया गया था। उनके अनुसार आंदोलन का केंद्र बिंदु हमेशा छात्र और उनकी आकांक्षाएं रही हैं।

अनशन समाप्त करने से पहले सरकार से मांगा भरोसा

सोनम वांगचुक ने सरकार से अपील की कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाए। उनका कहना है कि इन युवाओं का उद्देश्य केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग करना था।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा देती है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होगी और छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी, तो वह पूरे विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।

शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर फिर केंद्रित हुई बहस

सोनम वांगचुक का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब देश में नीट परीक्षा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर बहस लगातार तेज बनी हुई है। विपक्ष इन मुद्दों को संसद में उठाने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार भी इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की दिशा में कदम उठा रही है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार वांगचुक की अपील और उनकी ओर से रखी गई शर्तों पर क्या निर्णय लेती है। यदि सकारात्मक समाधान निकलता है तो यह आंदोलन एक नए मोड़ पर पहुंच सकता है।

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