‘जब मंत्री बदले जा सकते हैं तो शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों नहीं दे सकते?’ उद्धव ठाकरे से मुलाकात के बाद अरविंद केजरीवाल का केंद्र पर बड़ा हमला

नई दिल्ली : देश में नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। इसी बीच आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात सांसद संजय राउत के आवास पर हुई, जिसके बाद आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम मुद्दे उठाए गए।

अरविंद केजरीवाल ने इस दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार समय-समय पर अन्य मंत्रियों में बदलाव कर सकती है, तो शिक्षा मंत्री भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ सकते हैं।

नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा

प्रेस वार्ता में केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, छात्रों के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर देशभर से पहुंचे हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित, नाराज और निराश दिखाई दिए। उनके अनुसार, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

केजरीवाल ने बताया कि वह मंगलवार को जंतर-मंतर पहुंचे थे और प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की थी। बाद में उद्धव ठाकरे ने भी आंदोलन में शामिल प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी बात सुनी।

“युवा देश का भविष्य हैं”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कनॉट प्लेस, जनपथ और जंतर-मंतर क्षेत्र में पूरी रात अलग-अलग राज्यों से आए छात्रों और युवाओं की मौजूदगी रही। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी थी कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जाए, लेकिन लगातार हो रही गड़बड़ियों ने छात्रों का विश्वास कमजोर किया है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांग

केजरीवाल ने कहा कि यदि सरकार विभिन्न मंत्रालयों में समय-समय पर बदलाव कर सकती है, तो शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ना चाहिए और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का समर्थन जारी रखेगी।

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे, तो उनके साथ सख्ती और बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनकी चिंताओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार, छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस विषय को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।

उद्धव ठाकरे ने भी जताया छात्रों के आंदोलन को समर्थन

संयुक्त प्रेस वार्ता में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी नीट पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ सख्ती करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। ठाकरे ने आरोप लगाया कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ अपनाया गया रवैया जनता में असंतोष बढ़ाने वाला है।

उन्होंने यह भी कहा कि वह छात्रों और सीजेपी के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन के समर्थन में खड़े रहेंगे और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।

शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक बहस तेज

नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच विपक्ष लगातार सरकार से जवाबदेही तय करने, संसद में चर्चा कराने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहा है। वहीं सरकार की ओर से भी इस पूरे मामले पर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रिया सामने आ रही है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े इन मुद्दों पर आने वाले दिनों में सरकार क्या कदम उठाती है और संसद में इस विषय पर क्या रुख अपनाया जाता है।

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