कर्णप्रयाग मारपीट केस में चारों निहंग सिखों को मिली जमानत, जेल से रिहा होकर पांवटा साहिब पहुंचे; बोले- ‘हम किसी के खिलाफ नहीं हैं’

चमोली/पांवटा साहिब: उत्तराखंड के चर्चित कर्णप्रयाग मारपीट मामले में गिरफ्तार चारों निहंग सिखों को अदालत से बड़ी राहत मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत से जमानत मिलने के बाद चारों आरोपी जेल से रिहा होकर हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब पहुंचे, जहां विभिन्न निहंग सिख जत्थेबंदियों और संगत ने उनका स्वागत किया। रिहाई के बाद निहंग सिखों ने स्पष्ट कहा कि उनका किसी के खिलाफ कोई विरोध नहीं है और वे कानून तथा प्रशासन के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ेंगे।

रिहाई के बाद दिया शांति का संदेश

पांवटा साहिब पहुंचने के बाद एक निहंग सिख ने कहा कि 25 जून को उन्होंने यह संकल्प लिया था कि सभी गिरफ्तार सिखों की जमानत सुनिश्चित कर उन्हें सुरक्षित पंजाब लेकर जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रयास में प्रशासन, संगत, विभिन्न जत्थेबंदियों और हरियाणा कमेटी का सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि सभी के संयुक्त प्रयास से यह अभियान सफल हुआ और उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ संघर्ष करना नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने साथियों को न्याय दिलाना था।

चारों आरोपियों को अदालत से मिली जमानत

चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई मारपीट की घटना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह की अदालत ने चारों आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने सतविन्द्र सिंह, अजय सिंह, जसनप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके या दो-दो जमानतदारों के आधार पर जमानत देने का आदेश दिया।

एक आरोपी एम्स ऋषिकेश में था भर्ती

मामले में तीन आरोपी पुरसाड़ी जेल में न्यायिक हिरासत में बंद थे, जबकि एक आरोपी इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती था और वहीं न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया था। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चारों को जमानत देने का फैसला सुनाया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता मोहन पंत ने अदालत में पैरवी की।

16 जून को हुई थी मारपीट की घटना

यह पूरा मामला 16 जून का है, जब चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के बाद मारपीट की घटना हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस मामले की विवेचना हरिद्वार जनपद को स्थानांतरित कर दी गई।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी थी बहस

घटना के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़ी कई तरह की पोस्ट और प्रतिक्रियाएं तेजी से वायरल हुई थीं। हालांकि पुलिस ने लोगों से अपुष्ट और भ्रामक जानकारी साझा करने से बचने की अपील की थी। अब अदालत से जमानत मिलने के बाद चारों आरोपियों की रिहाई की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।

Share:
Copied!