केजरीवाल-सिसोदिया को हाई कोर्ट से 4 हफ्ते की और मोहलत, CBI की याचिका पर जवाब देने का मिला ‘आखिरी मौका’

नई दिल्ली: दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आप नेताओं को आरोपों से मुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल CBI की याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने आप नेताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जवाब दाखिल करने के लिए यह आखिरी मौका है।

CBI की याचिका पर जवाब के लिए मिला चार सप्ताह का समय

मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज जैन की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत संबंधित आप नेताओं को CBI की पुनरीक्षण याचिका पर अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। अदालत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि इसके बाद जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

CBI ने विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आप नेताओं को आरोप मुक्त किया गया था। अब हाई कोर्ट में इस याचिका पर आप नेताओं का जवाब और उसके बाद CBI का पक्ष मामले की अगली दिशा तय करेगा।

13 अगस्त को केजरीवाल और सिसोदिया ने दाखिल की थी अलग-अलग अर्जियां

इससे पहले 13 अगस्त को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। दोनों नेताओं ने हाई कोर्ट से CBI की उस याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया, जिसमें विशेष अदालत के आरोपमुक्त करने के आदेश को चुनौती दी गई है।

आप नेताओं की ओर से CBI की याचिका दाखिल करने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए। उनका आरोप है कि एजेंसी ने मामले में अभूतपूर्व जल्दबाजी दिखाई और याचिका बेहद गैर-गंभीर तरीके से दाखिल की गई।

केजरीवाल-सिसोदिया ने CBI की याचिका की स्वीकार्यता पर उठाए सवाल

अपनी अलग-अलग अर्जियों में केजरीवाल और सिसोदिया ने CBI की पुनरीक्षण याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि याचिका अधूरी और अस्पष्ट है और इससे उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझने में परेशानी हो रही है कि एजेंसी की ओर से उनके खिलाफ वास्तव में क्या मामला बनाया गया है।

आप नेताओं की ओर से यह भी दावा किया गया कि विशेष न्यायाधीश के आरोपमुक्त करने के आदेश के करीब चार घंटे के भीतर ही CBI ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर दी थी। उनके अनुसार, इतनी जल्दी में 500 से अधिक पन्नों वाले फैसले में दर्ज विशेष न्यायाधीश के निष्कर्षों और टिप्पणियों का पर्याप्त अध्ययन किया जाना संभव नहीं था।

500 से ज्यादा पन्नों के फैसले को लेकर भी सवाल

केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दाखिल अर्जियों में कहा गया कि जिस फैसले को चुनौती दी गई है, वह 500 से अधिक पन्नों का था। उनका तर्क है कि इतने विस्तृत फैसले के खिलाफ केवल कुछ घंटों में पुनरीक्षण याचिका दायर किया जाना CBI की जल्दबाजी को दर्शाता है।

आप नेताओं ने यह भी कहा कि CBI की याचिका में लगाए गए आरोपों को वे पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने हाई कोर्ट से CBI की याचिका को खारिज करने की मांग की है।

पिछली सुनवाई में भी दिया गया था आखिरी मौका

इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज जैन ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को CBI की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। अब सोमवार की सुनवाई में अदालत ने एक बार फिर चार सप्ताह की मोहलत दी है और इसे जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर बताया है।

इससे पहले जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष हुई कार्यवाही का केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से बहिष्कार किए जाने का भी संदर्भ सामने आया था। मौजूदा कार्यवाही में अब अदालत का ध्यान मुख्य रूप से CBI की पुनरीक्षण याचिका और उसके खिलाफ आप नेताओं के जवाब पर है।

आगे क्या होगा?

अब चार सप्ताह के भीतर केजरीवाल, सिसोदिया और संबंधित पक्षों को CBI की याचिका पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद हाई कोर्ट CBI की ओर से उठाए गए कानूनी मुद्दों और आप नेताओं की आपत्तियों पर सुनवाई करेगा। शराब नीति मामले में आरोपमुक्त किए जाने के विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ CBI की चुनौती पर हाई कोर्ट का रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे मामले की आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

फिलहाल अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए समय बढ़ा दिया है, लेकिन साथ ही यह साफ कर दिया है कि यह आखिरी मौका है। ऐसे में अब सभी की नजर चार सप्ताह के भीतर दाखिल होने वाले जवाब और उसके बाद होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी।

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