रांची: झारखंड में JPSC-JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद और अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच CID ने JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने सोमवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के सचिव सुधीर गुप्ता के ठिकानों पर छापेमारी की। CID की टीम ने सुबह करीब पांच बजे मोरहाबादी स्थित हरिहर सिंह रोड के आवास पर पहुंचकर तलाशी शुरू की। कई घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की गई और कुछ दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सुबह-सुबह सचिव के आवास पर पहुंची CID की टीम
जानकारी के अनुसार, CID की टीम ने कार्रवाई की शुरुआत JSSC सचिव सुधीर गुप्ता के मोरहाबादी स्थित आवास से की। सुबह तड़के शुरू हुई तलाशी के दौरान टीम ने घर में मौजूद दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड को खंगाला। जांच एजेंसी की इस कार्रवाई को JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों में परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, जांच में जब्त सामग्री से क्या-क्या तथ्य सामने आए हैं, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
JSSC कार्यालय में भी CID की छापेमारी
आवास पर कार्रवाई के बाद CID की टीम JSSC कार्यालय भी पहुंची। यहां आयोग से संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की गई। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि JSSC CGL परीक्षा की प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अनियमितता तो नहीं हुई।
कार्यालय में उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ-साथ परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ इन दस्तावेजों से महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की जानकारी
मिली जानकारी के मुताबिक, CID की टीम ने JSSC कार्यालय में सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ भी की। इसके बाद उन्हें नामकुम थाने बुलाकर पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी परीक्षा से संबंधित फैसलों, दस्तावेजों और पूरी प्रक्रिया को लेकर जानकारी जुटा रही है।
हालांकि, पूछताछ में क्या सवाल किए गए और अधिकारियों की ओर से क्या जवाब दिया गया, इसकी पूरी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
JSSC CGL के सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की भी होगी जांच
जांच का दायरा अब JSSC CGL परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों तक पहुंचने की बात कही जा रही है। जानकारी के अनुसार, परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा सकती है। जांच के दौरान यदि किसी अभ्यर्थी के दस्तावेज या परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की संभावना रहेगी।
फिलहाल जांच एजेंसी की कार्रवाई का उद्देश्य पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। इसलिए किसी भी अभ्यर्थी या व्यक्ति को दोषी मानने से पहले जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी होगा।
JSSC CGL पेपर लीक और कथित गड़बड़ी का मामला क्या है?
JSSC CGL यानी झारखंड जनरल ग्रेजुएट लेवल कंबाइंड कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन (JGGLLCCE-2023) को लेकर पहले से ही कथित पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप उठते रहे हैं। इसी मामले की जांच चल रही है। अब JSSC सचिव के आवास और आयोग कार्यालय में CID की छापेमारी के बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया है।
जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद यह उम्मीद बढ़ी है कि दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल से परीक्षा में कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच तेज हुई जांच
JSSC CGL सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर झारखंड में अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, कथित गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय करना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल रही है।
ऐसे समय में CID की छापेमारी से अभ्यर्थियों के बीच भी हलचल तेज हो गई है। जांच एजेंसी की कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि मामला केवल विभागीय या प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित अनियमितताओं के हर पहलू की जांच की जा रही है।
अधिकारी से लेकर अभ्यर्थी तक जांच के दायरे में आ सकते हैं
जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, अभ्यर्थी या कथित बिचौलिये की भूमिका से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, किसी की भूमिका या दोष तय होना जांच में सामने आने वाले प्रमाणों पर निर्भर करेगा।
यही वजह है कि फिलहाल CID की कार्रवाई और उसके बाद सामने आने वाले दस्तावेजों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार थे।
डिजिटल रिकॉर्ड पर भी CID की नजर
जांच में केवल कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आयोग से जुटाए जा रहे दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य डेटा की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी इन रिकॉर्ड के जरिए घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर सकती है।
फिलहाल CID की जांच जारी है। छापेमारी में मिले दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड आगे की जांच की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं। अब सबकी नजर जांच एजेंसी की रिपोर्ट और आने वाले निष्कर्षों पर है। आखिरकार इस पूरे मामले में अंतिम तस्वीर आरोपों से नहीं, बल्कि जांच में सामने आने वाले ठोस सबूतों से ही साफ होगी।
