परिसीमन पर दक्षिण के मुख्यमंत्रियों की बड़ी मांग: अमित शाह के सुझाव पर राज्यों ने जताई सहमति, 543 लोकसभा सीटों को लेकर क्या हुआ?

नई दिल्ली: दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में गुरुवार को अंतरराज्यीय जल विवाद से लेकर लोकसभा सीटों के परिसीमन तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों ने जल विवादों को बातचीत और आपसी समन्वय के जरिए जल्द सुलझाने के सुझाव का समर्थन किया। वहीं, लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताएं भी बैठक में प्रमुखता से सामने आईं। खास तौर पर कर्नाटक और तमिलनाडु की ओर से मौजूदा 543 लोकसभा सीटों की संख्या को लंबे समय तक बनाए रखने की मांग रखी गई।

अमित शाह ने जल विवादों पर दिया बातचीत का फॉर्मूला

दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में अमित शाह ने राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों को जल्द खत्म करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्यों के हितों की रक्षा करना स्वाभाविक है, लेकिन यदि किसी विवाद के चलते कोई राज्य वर्षों तक पानी से वंचित रहता है और पानी समुद्र में बह जाता है, तो ऐसी स्थिति से किसी पक्ष का वास्तविक हित पूरा नहीं होता।

गृह मंत्री ने राज्यों से अपील की कि ऐसे विवादों को बातचीत, संयुक्त बैठकों और आपसी सहमति के माध्यम से जल्द सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि जल संसाधनों का इस्तेमाल राज्यों के बीच विवाद बढ़ाने के बजाय विकास और सहयोग के लिए किया जाए।

ब्रह्मपुत्र से कावेरी और गोदावरी तक नदियों को जोड़ने की बात

अमित शाह ने देश में जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए प्रमुख नदियों को जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने ब्रह्मपुत्र से लेकर कावेरी और गोदावरी तक नदियों को जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही। उनके अनुसार, इस तरह की दीर्घकालिक योजना भारत को आने वाले लंबे समय तक पानी की कमी से बचाने में मदद कर सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि नदी जोड़ने की परियोजनाओं से जलमार्गों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। बैठक में जल विवादों के समाधान को क्षेत्रीय विकास और सहकारी संघवाद से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया।

परिसीमन पर दक्षिणी राज्यों की चिंता क्या है?

दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। दक्षिणी राज्यों की प्रमुख चिंता यह है कि यदि भविष्य में लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वृद्धि वाले दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।

दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण समेत कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें परिसीमन की प्रक्रिया में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नुकसान का सामना नहीं करना चाहिए। इसी वजह से मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या को लेकर दक्षिणी राज्यों की ओर से स्पष्ट मांग सामने आई।

कर्नाटक और तमिलनाडु ने 543 सीटें बनाए रखने की मांग की

कर्नाटक और तमिलनाडु की ओर से लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग रखी गई। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के माध्यम से केंद्र सरकार के सामने कई सुझाव रखने की बात कही।

शिवकुमार की ओर से 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने, अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की 543 सीटों की संख्या बरकरार रखने और महिलाओं के लिए आरक्षण को मौजूदा लोकसभा सीटों के भीतर ही लागू करने की मांग रखी गई।

क्या परिसीमन पर बनी सहमति?

बैठक में दक्षिणी राज्यों की ओर से परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं और सुझाव रखे गए। हालांकि, इसे किसी अंतिम परिसीमन समझौते के तौर पर नहीं देखा जा सकता। राज्यों की ओर से केंद्र के सामने अपनी मांगें और प्रस्ताव रखे गए हैं। ऐसे में परिसीमन के मुद्दे पर आगे की राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

दक्षिणी राज्यों की चिंता मूल रूप से इस बात को लेकर है कि भविष्य में सीटों के पुनर्वितरण से उनके मौजूदा राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अनुपात कम हो सकता है। इसलिए वे सीटों की संख्या को लेकर दीर्घकालिक सुरक्षा चाहते हैं।

मेकेदातु बांध पर कर्नाटक का तमिलनाडु को भरोसा

बैठक के दौरान कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मेकेदातु बांध परियोजना से जुड़ा मुद्दा भी सामने आया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु को आश्वासन दिया कि मेकेदातु परियोजना के आगे बढ़ने की स्थिति में तमिलनाडु और पुडुचेरी के हितों की रक्षा की जाएगी।

बैठक के बाद शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पड़ोसी राज्यों के हितों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। कावेरी नदी से जुड़े विवादों के बीच मेकेदातु परियोजना लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच संवेदनशील मुद्दा रही है।

बैठक में कावेरी जल विवाद पर नहीं हुई चर्चा

तमिलनाडु की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की इस बैठक में कर्नाटक के साथ चल रहे कावेरी जल बंटवारे के विवाद पर चर्चा नहीं हुई। तमिलनाडु के मंत्री ने कहा कि बैठक के दौरान कावेरी नदी जल विवाद या कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण से जुड़े मामलों को एजेंडे में नहीं उठाया गया।

इससे साफ है कि बैठक में व्यापक अंतरराज्यीय जल प्रबंधन और सहयोग पर चर्चा हुई, लेकिन कावेरी के मौजूदा विवाद को अलग रखा गया।

चंद्रबाबू नायडू ने रखा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बैठक में दक्षिण भारत के परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। उन्होंने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले कॉरिडोर की बात कही, जिसे कुप्पम के रास्ते विकसित करने का प्रस्ताव सामने रखा गया।

नायडू ने अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले ट्रांजिट नेटवर्क का सुझाव भी दिया। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े लंबित मामलों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के माध्यम से सुलझाने पर सहमति की बात सामने आई।

केरल ने उठाया मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा

केरल की ओर से मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा बैठक में उठाया गया। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में राज्यों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा केरल और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा है। ऐसे में दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में इसका उठना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तेलंगाना ने कृष्णा नदी के पानी पर मांगा अधिकार

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमरका ने कृष्णा नदी के जल पर राज्य के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने राज्य की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की मांग भी रखी।

वहीं, पुडुचेरी की ओर से उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने पूरे साल पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से तमिलनाडु के साथ सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने एकीकृत सतही जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया।

दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कई बड़े मुद्दे एक साथ

दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में सामने आए मुद्दों से स्पष्ट है कि दक्षिण भारत के राज्यों के बीच जल, परिवहन, परिसंपत्तियों के बंटवारे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषय अभी भी महत्वपूर्ण हैं। एक तरफ अमित शाह ने अंतरराज्यीय जल विवादों को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया, तो दूसरी तरफ दक्षिणी राज्यों ने परिसीमन को लेकर अपनी राजनीतिक चिंताएं केंद्र के सामने रखीं।

परिसीमन के मुद्दे पर 543 लोकसभा सीटों को बनाए रखने की मांग इस बैठक की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक चर्चाओं में रही। हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही तय होगा। आने वाले समय में परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की मांग और केंद्र के रुख पर देश की राजनीति की नजर बनी रहेगी।

Share:
Copied!