बांग्लादेश : बांग्लादेश में भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण पर रोक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे ने देश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के बीच व्यापक असंतोष पैदा कर दिया है। राजधानी ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक आस्था का सम्मान सुनिश्चित करने और कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
81 फीट ऊंची भगवान राम प्रतिमा का निर्माण अचानक रुका
विवाद की जड़ गायबांधा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में स्थित श्री श्री राधा गोविंद एवं काली मंदिर परिसर से जुड़ी हुई है। यहां भगवान राम की 81 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा था, जिसे क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण धार्मिक परियोजना माना जा रहा था। लगभग 22 करोड़ टका की लागत वाली इस प्रतिमा का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका था।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कुछ कट्टरपंथी समूहों द्वारा प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने और निर्माण कार्य रोकने की धमकियां मिलने के बाद मंदिर प्रबंधन समिति ने सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से परियोजना को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया। इस फैसले ने हिंदू समुदाय के भीतर गहरी नाराजगी पैदा कर दी।
भगवान राम के चित्र के कथित अपमान से भड़का विरोध
मामले को और अधिक संवेदनशील बनाने वाली एक अन्य घटना भगवान राम के चित्र के कथित अपमान से जुड़ी बताई जा रही है। इस घटना के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों के छात्र समूह भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो गए।
ढाका विश्वविद्यालय से जुड़े कई छात्र संगठनों ने मशाल जुलूस निकालकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जगन्नाथ हाल छात्र संघ के सामाजिक कल्याण सचिव राम प्रसाद साहा तोपु ने कहा कि कुछ तत्व अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के जरिए सामाजिक माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।
हिंदू संगठनों ने सरकार को दिया 72 घंटे का अल्टीमेटम
विवाद के बीच हिंदू महाजोट और अन्य सामाजिक संगठनों ने ढाका के शाहबाग चौराहे से नेशनल प्रेस क्लब तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं और उन्हें पूरा करने के लिए 72 घंटे का समय दिया है।
संगठनों की प्रमुख मांगों में भगवान राम के चित्र के कथित अपमान से जुड़े लोगों की शीघ्र गिरफ्तारी और रुके हुए प्रतिमा निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे देश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
कुछ संगठनों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि प्रतिमा निर्माण फिर से शुरू नहीं किया गया, तो वे बांग्लादेश के विभिन्न जिलों में नए मंदिर निर्माण अभियानों की शुरुआत करने पर विचार कर सकते हैं।
अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने भी मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
संगठन का कहना है कि देश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस वर्ष के दौरान सांप्रदायिक तनाव और धार्मिक विवादों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
सरकार ने दोहराया धार्मिक स्वतंत्रता का वादा
सरकार की ओर से सभी धार्मिक समुदायों को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। प्रशासन का कहना है कि देश में सामाजिक सद्भाव बनाए रखना और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
हालांकि, भगवान राम प्रतिमा विवाद ने बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों को फिर से राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। अब सबकी नजर सरकार की आगामी कार्रवाई और विरोध कर रहे संगठनों के अगले कदम पर टिकी हुई है।
