Anti-Paper Leak Bill 2026: लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल पास, नकल माफियाओं पर कसेगा शिकंजा, जुर्माना ₹50 लाख तक बढ़ाने का प्रस्ताव

लोकसभा में विपक्ष के हंगामे और तीखी बहस के बीच एंटी पेपर लीक बिल को ध्वनि मत से मंजूरी मिलने की खबर है। रिपोर्टों के अनुसार, यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए मौजूदा कानून को और सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार 29 जुलाई को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026, जिसे आम तौर पर एंटी पेपर लीक बिल कहा जा रहा है, ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और अन्य अनुचित गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। बिल के पारित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी।

सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस

बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्ष की ओर से राहुल गांधी ने छात्रों की आवाज और उनकी भावनाओं का सम्मान किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवाओं का विरोध लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा है और सभी राजनीतिक दलों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

वहीं सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष को केवल राजनीतिक टिप्पणी करने के बजाय विधेयक को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव देने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यह कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम कदम साबित होगा।

क्या होंगे नए प्रावधान?

रिपोर्टों के अनुसार, यह संशोधन विधेयक वर्ष 2024 के मौजूदा कानून को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। इसमें पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों की त्वरित जांच, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनवाई, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति और अपीलों के समयबद्ध निपटान जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य संगठित परीक्षा घोटालों पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

सजा और जुर्माने में प्रस्तावित बढ़ोतरी

विधेयक में परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने या पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए दंड को और कठोर बनाने का प्रस्ताव है। रिपोर्टों के अनुसार, दोषियों के लिए कम से कम पांच वर्ष की सजा, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही अधिकतम जुर्माने की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख किए जाने का भी प्रस्ताव शामिल है। सरकार का कहना है कि इससे परीक्षा माफियाओं और संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

सरकार का दावा, छात्रों का भरोसा होगा मजबूत

सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना नहीं, बल्कि देशभर में होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करना भी है। यदि यह कानून पूरी तरह लागू होता है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ने और पेपर लीक की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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