Assam Air Force Crash: भोजपुर का वीर सपूत दानिश आलम देश पर हुआ कुर्बान, छुट्टी से लौटने के कुछ दिन बाद ही मिली शहादत

बिहार के भोजपुर जिले के लिए असम से आई एक दुखद खबर ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। भारतीय वायु सेना के एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान हादसे में भोजपुर के कोईलवर प्रखंड निवासी अग्निवीरवायु दानिश आलम ने देश सेवा के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया है। महज 22 वर्ष की उम्र में शहीद हुए दानिश अब तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटेंगे। इस खबर के बाद परिवार, रिश्तेदारों और ग्रामीणों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।

जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर हुआ दर्दनाक हादसा

असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायु सेना का एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा इतना भीषण था कि विमान में सवार पांच वायुसेना कर्मियों की जान चली गई। इनमें भोजपुर जिले के कायमनगर गांव निवासी अग्निवीरवायु दानिश आलम भी शामिल थे। हादसे की सूचना मिलते ही उनके गांव में मातम छा गया और हर आंख नम हो गई।

इकलौते बेटे की शहादत से टूट गया परिवार

दानिश आलम, मोहम्मद फारूक आलम और अख्तरी बेगम के इकलौते पुत्र थे। उनके पिता गीधा औद्योगिक क्षेत्र की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। परिवार में उनकी दो बड़ी बहनें हैं, जिनमें एक की शादी हो चुकी है। इकलौते बेटे के शहीद होने की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

बचपन से था वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना

स्वजनों के अनुसार दानिश बचपन से ही देश की सेवा करने का सपना देखते थे। सेना और वायुसेना के प्रति उनका विशेष लगाव था। कठिन मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने अग्निवीरवायु में अपना स्थान बनाया और देश सेवा के अपने सपने को साकार किया। गांव के लोगों का कहना है कि दानिश हमेशा अनुशासित और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहते थे।

अग्निवीरवायु में चयन के बाद शुरू हुआ सफर

दानिश आलम ने 29 जून 2025 को बिहटा एयर फोर्स स्टेशन में अपनी सेवा की शुरुआत की थी। इसके बाद 3 जुलाई को उन्हें कर्नाटक के बेलगांव में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी तैनाती असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर की गई थी। पिछले वर्ष अक्टूबर से वह वहीं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे।

30 मई को लौटे थे ड्यूटी, फिर आई शहादत की खबर

परिजनों के मुताबिक दानिश 23 मई को छुट्टी लेकर अपने घर आए थे। परिवार के साथ कुछ दिन बिताने के बाद 30 मई को वह वापस ड्यूटी पर लौट गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी विदाई होगी। ड्यूटी पर लौटने के कुछ ही दिनों बाद उनकी शहादत की खबर पहुंची, जिसने पूरे परिवार और गांव को स्तब्ध कर दिया।

हादसे में चार अन्य जवानों ने भी दिया सर्वोच्च बलिदान

भारतीय वायु सेना द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस विमान दुर्घटना में दानिश आलम के अलावा स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा और अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत भी वीरगति को प्राप्त हुए हैं। देश सेवा के दौरान बलिदान देने वाले इन सभी वीर जवानों को राष्ट्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

गांव में शोक, लेकिन बेटे की शहादत पर गर्व

कायमनगर गांव में शोक का माहौल है, लेकिन लोगों को अपने वीर सपूत पर गर्व भी है। ग्रामीणों का कहना है कि दानिश ने अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे भोजपुर और बिहार का नाम रोशन किया है। उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

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