Israel Election: नेतन्याहू के सामने बहुमत का संकट, अरब पार्टियां बनीं किंगमेकर; क्या विरोधियों से मांगेंगे समर्थन?

Israel Government Formation: इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी उठापटक तेज हो गई है। करीब 90 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थक गुट को 53 सीटें, जबकि विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलने की बात सामने आई है। 120 सदस्यीय इजरायली संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का आंकड़ा पार करना जरूरी है। ऐसे में अरब पार्टियों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नेतन्याहू बहुमत जुटाने के लिए उन्हीं अरब दलों का समर्थन लेने पर विचार करेंगे, जिन पर उनकी पार्टी ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं?

Israel Election Results: बहुमत से दूर नेतन्याहू का गठबंधन, बढ़ी राजनीतिक चुनौती

इजरायल की राजनीति में सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता बढ़ती दिखाई दे रही है। उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड और उसके समर्थक गुट को 53 सीटें मिलने का अनुमान है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन 48 सीटों पर आगे बताया जा रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों में से कोई भी अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का बहुमत हासिल करता नहीं दिख रहा है।

इजरायल की संसद को नेसेट (Knesset) कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में शेष सीटों पर आने वाले नतीजे और छोटे राजनीतिक दलों का रुख सत्ता की दिशा तय कर सकता है।

Arab Parties Kingmaker: सरकार बनाने में अरब दलों की भूमिका क्यों अहम?

इस राजनीतिक समीकरण में अरब पार्टियां किंगमेकर के तौर पर उभर रही हैं। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, दोनों अरब दलों की संयुक्त सीटें करीब 19 तक पहुंच सकती हैं। यदि ये दल किसी गठबंधन को समर्थन देते हैं, तो सरकार बनाने की संभावनाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।

इजरायल की आबादी में अरब मूल के नागरिकों की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत बताई जाती है। उनके राजनीतिक प्रतिनिधि संसद में अपनी मौजूदगी के जरिए सरकार गठन की प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों के लिए अरब दलों का रुख महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करना केवल सीटों का गणित नहीं है। इसके साथ राजनीतिक विचारधारा, सुरक्षा नीति, गठबंधन की शर्तें और नेताओं के पुराने बयानों जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं। यही वजह है कि सरकार बनाने की संभावनाएं कई स्तरों पर उलझी हुई दिखाई दे रही हैं।

Netanyahu’s Likud Party: अरब पार्टियों पर लगाए गए चुनावी गड़बड़ी के आरोप

नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब पार्टियों पर चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। पार्टी की ओर से मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी, मतदाताओं को धमकाने, हिंसा और प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल जैसे दावे किए गए हैं।

इसके अलावा, पार्टी ने दावा किया कि हजारों लिफाफों में नकदी और राआम पार्टी के मतपत्र मिले। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई प्रमाण सामने रखे जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों को प्रमाणित तथ्य के बजाय राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

अब राजनीतिक परिस्थितियां एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर रही हैं। यदि बहुमत हासिल करने के लिए अरब दलों का समर्थन जरूरी हो जाता है, तो क्या नेतन्याहू अपने पुराने आरोपों के बावजूद उनसे बातचीत करेंगे? या फिर वह दूसरे राजनीतिक दलों को अपने साथ लाने की कोशिश करेंगे? इसका जवाब अंतिम चुनावी नतीजों और गठबंधन वार्ताओं के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

Israel Government Formation: सरकार बनाने के चार संभावित रास्ते

इजरायल में बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए फिलहाल चार संभावित राजनीतिक विकल्पों की चर्चा की जा रही है। हर विकल्प के सामने अपनी चुनौतियां हैं और किसी भी रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

1. राष्ट्रीय एकता सरकार: नेतन्याहू और गादी आइसेनकोट आ सकते हैं साथ?

पहला विकल्प राष्ट्रीय एकता सरकार का गठन है। इस स्थिति में नेतन्याहू अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसा गठबंधन संसद में बहुमत जुटाने का एक रास्ता बन सकता है।

हालांकि, दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद इस संभावना को कठिन बनाते हैं। आइसेनकोट का चुनाव अभियान नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के मुद्दे पर केंद्रित रहा है। वह नेतन्याहू से राजनीति से संन्यास लेने की मांग भी कर चुके हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच समझौता होने की स्थिति में नीतिगत और नेतृत्व संबंधी मुद्दे बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

2. अरब पार्टियों के समर्थन से विपक्षी सरकार बनाने की कोशिश

दूसरा विकल्प विपक्षी गठबंधन की ओर से अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करना है। बहुमत के लिए जरूरी सीटें जुटाने के लिहाज से यह रास्ता महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसके सामने भी राजनीतिक बाधाएं हैं।

आइसेनकोट और उनके सहयोगियों ने पहले अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था। इसके बावजूद, यदि अंतिम नतीजों में बहुमत का गणित उनके पक्ष में नहीं बनता है, तो राजनीतिक दलों के सामने अपने रुख पर पुनर्विचार करने का दबाव आ सकता है।

राआम पार्टी के लगभग सात सीटें जीतने का अनुमान जताया गया है। पार्टी ने विपक्षी सरकार में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है। दूसरी ओर, जॉइंट लिस्ट को करीब 12 सीटें मिलने का अनुमान है और उसने सरकार को बाहर से समर्थन देने की बात कही है।

यदि इन दलों और विपक्षी गठबंधन के बीच सहमति बनती है, तो नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने की कोशिश को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम परिणाम क्या रहते हैं और संबंधित दल किन शर्तों पर समर्थन देने के लिए तैयार होते हैं।

3. विपक्षी गठबंधन में सेंध लगाकर बहुमत जुटाने की रणनीति

तीसरा विकल्प नेतन्याहू के लिए दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं को अपने पक्ष में लाने का हो सकता है। इस रणनीति के तहत वह नफ्ताली बेनेट और अविग्दोर लिबरमैन जैसे नेताओं से समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

इन नेताओं के विचार सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दक्षिणपंथी राजनीति के करीब माने जाते हैं। ऐसे में कुछ नीतिगत मुद्दों पर समानता होने के बावजूद नेतन्याहू के साथ गठबंधन करना उनके लिए राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा।

यदि नेतन्याहू विपक्षी खेमे के कुछ सांसदों या दलों को अपने साथ लाने में सफल होते हैं, तो बहुमत का गणित बदल सकता है। लेकिन इस विकल्प की सफलता गठबंधन की शर्तों, नेतृत्व को लेकर सहमति और चुनाव के बाद बनने वाले राजनीतिक माहौल पर निर्भर करेगी।

4. बहुमत नहीं मिला तो इजरायल में फिर हो सकते हैं चुनाव

चौथा विकल्प नए चुनाव का है। यदि कोई भी राजनीतिक गठबंधन 61 सीटों का जरूरी आंकड़ा हासिल नहीं कर पाता और सरकार गठन को लेकर सहमति नहीं बनती, तो इजरायल को दोबारा चुनाव की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में नई सरकार बनने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बने रह सकते हैं। हालांकि, दोबारा चुनाव कराना अंतिम परिणामों और सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही तय हो सकता है।

नए चुनाव की संभावना राजनीतिक अनिश्चितता को और बढ़ा सकती है। इससे न केवल राजनीतिक दलों की रणनीतियां बदलेंगी, बल्कि देश की सुरक्षा, विदेश नीति और घरेलू मुद्दों पर भी असर पड़ सकता है।

Israel Election Counting: अभी कितने वोटों की गिनती बाकी?

सरकार गठन की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होने से पहले अनुपस्थित मतपत्रों की गिनती भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सैनिकों, राजनयिकों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों सहित विभिन्न समूहों के लगभग 4.30 लाख से 4.80 लाख अनुपस्थित मतपत्रों की गिनती बाकी बताई गई है।

इन मतपत्रों की गिनती पूरी होने के बाद सीटों के अंतिम आंकड़ों में बदलाव हो सकता है। इसलिए शुरुआती रुझानों और अनुमानों को अंतिम चुनाव परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम नतीजे आने में एक से दो दिन लगने की संभावना जताई गई है।

राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की भूमिका भी होगी अहम

अंतिम चुनाव परिणाम आने के बाद इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वह उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं, जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना हो।

सरकार गठन की पूरी प्रक्रिया में कई सप्ताह लग सकते हैं। संबंधित नेता को संसद में जरूरी समर्थन जुटाना होगा और गठबंधन के सहयोगियों के बीच सहमति बनानी होगी। यदि कोई भी पक्ष बहुमत साबित करने में सफल नहीं होता है, तो राजनीतिक गतिरोध और गहरा सकता है।

Netanyahu Government: क्या सत्ता में बने रहेंगे नेतन्याहू या होगा नया चुनाव?

इजरायल में सरकार गठन का अगला चरण कई सवालों के जवाब तय करेगा। क्या नेतन्याहू अरब पार्टियों से समर्थन मांगेंगे? क्या विपक्ष अपने पुराने रुख में बदलाव करके अरब दलों के साथ सरकार बनाने पर सहमत होगा? क्या राष्ट्रीय एकता सरकार का विकल्प सामने आएगा या फिर देश को एक बार फिर चुनाव में जाना पड़ेगा?

फिलहाल, शुरुआती सीटों के आंकड़े किसी भी पक्ष के लिए स्पष्ट बहुमत की तस्वीर पेश नहीं करते। अंतिम मतगणना, छोटे दलों की भूमिका और गठबंधन वार्ताएं ही तय करेंगी कि इजरायल में अगली सरकार किसकी बनेगी। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक घटनाक्रम देश की घरेलू राजनीति के साथ-साथ मध्य पूर्व की क्षेत्रीय परिस्थितियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

Share:
Copied!