JSSC CGL विवाद पर रघुवर दास का बड़ा बयान, बोले- CBI जांच कराकर दोषियों को नौकरी से हटाए सरकार; छात्रों के अनशन को दिया समर्थन

रांची: झारखंड में JSSC CGL समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ नौकरी पाने के लिए लेन-देन या अन्य अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें सरकारी सेवा से तत्काल हटाया जाना चाहिए। वहीं, मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं किए जाने की भी बात कही।

छात्रों ने 60 दिन का समय दिया, रघुवर दास ने स्थगित किया अनशन

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने छात्रों के समर्थन में प्रस्तावित अपना एकदिवसीय सांकेतिक अनशन फिलहाल स्थगित कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के बैनर तले आंदोलन कर रहे छात्रों ने अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया है।

छात्रों ने राज्य सरकार को CBI जांच की अनुशंसा करने के लिए 60 दिनों का समय दिया है। रघुवर दास ने कहा कि वह छात्रों के संघर्ष, समर्पण और उनके मुद्दों के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान करते हैं। छात्रों के निर्णय को देखते हुए उन्होंने भी अपना प्रस्तावित एकदिवसीय सांकेतिक अनशन स्थगित करने का फैसला किया है।

सरकार को एक सप्ताह का दिया था अल्टीमेटम

रघुवर दास ने कहा कि उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के मंच से राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय देकर उनकी मांगों पर निर्णय लेने की बात कही थी। उनका कहना था कि यदि सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो वह भगवान बिरसा मुंडा स्मारक स्थल पर एकदिवसीय अनशन करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान दौड़ में जान गंवाने वाले 19 अभ्यर्थियों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से उनका यह कार्यक्रम प्रस्तावित था। हालांकि, अब छात्रों ने अपने आंदोलन को 60 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है, इसलिए उन्होंने भी फिलहाल अनशन रोकने का फैसला किया है।

छात्रों के आंदोलन को BJP का नैतिक समर्थन

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों को भारतीय जनता पार्टी की ओर से नैतिक समर्थन भी प्राप्त था। उनके मुताबिक, राज्य सरकार ने छात्रों की कुछ मांगों पर निर्णय लिया है, लेकिन छात्रों की सबसे प्रमुख मांग अभी भी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की घोषणा है।

इसी मांग को लेकर छात्रों ने सरकार को 60 दिन का समय दिया है। अब इस अवधि में सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर छात्रों और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

रघुवर दास ने सरकार के सामने रखीं तीन बड़ी मांगें

रघुवर दास ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की CBI से जांच कराने की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान हो सके।

दूसरी मांग उत्पाद सिपाही भर्ती में दौड़ के दौरान जान गंवाने वाले 19 झारखंडी-मूलवासी अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की है। उन्होंने सरकार से इन परिवारों के लिए उचित आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने की मांग की।

तीसरी और महत्वपूर्ण मांग JSSC CGL के सफल अभ्यर्थियों से जुड़ी है। रघुवर दास का कहना है कि कथित गड़बड़ियों के कारण पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के बजाय जांच के माध्यम से उन अभ्यर्थियों में अंतर किया जाना चाहिए, जिन्होंने मेरिट के आधार पर सफलता हासिल की है और उन पर जिन पर अनियमित तरीके से नौकरी पाने के आरोप हैं।

‘मेरिट वाले छात्रों के साथ नहीं होना चाहिए अन्याय’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी ने अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर परीक्षा पास की है तो उसे किसी दूसरे की कथित गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने व्यापक जांच की जरूरत बताते हुए कहा कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों की पहचान की जानी चाहिए।

उनके मुताबिक, जो अभ्यर्थी कथित लेन-देन या गलत तरीके से सरकारी नौकरी में आए हैं, उन्हें जांच के बाद चिह्नित किया जाना चाहिए और दोष साबित होने पर ऐसे कर्मचारियों को नौकरी से तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।

JSSC CGL विवाद में आगे क्या होगा?

JSSC CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड में लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बना हुआ है। अब छात्रों द्वारा सरकार को CBI जांच की अनुशंसा के लिए 60 दिन का समय दिए जाने के बाद आने वाले दिनों में सरकार के फैसले पर सबकी नजर रहेगी।

फिलहाल रघुवर दास ने छात्रों के फैसले का सम्मान करते हुए अपना प्रस्तावित अनशन स्थगित कर दिया है। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और मेरिट वाले अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा का मुद्दा महत्वपूर्ण बना रहेगा।

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