MBBS छात्रा सेजल पवार पर FIR: शव को लेकर विवादित टिप्पणी पड़ी भारी, जानिए किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला और कितनी हो सकती है सजा

कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल से जुड़ी एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा डॉ. सेजल पवार द्वारा कथित तौर पर पुरुष शवों के निजी अंगों को लेकर की गई टिप्पणी पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। बढ़ते विवाद और सार्वजनिक नाराजगी के बीच महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद

बताया जा रहा है कि कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण के दौरान उपयोग किए जाने वाले शवों को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे मृतकों की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध के बाद यह मामला महाराष्ट्र साइबर पुलिस तक पहुंचा और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने दर्ज की FIR

रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने डॉ. सेजल पवार और कॉमेडियन प्रणीत मोरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायत का आधार मेडिकल शिक्षा में उपयोग किए जाने वाले मानव शवों के संदर्भ में की गई कथित टिप्पणियां हैं।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि वीडियो में की गई टिप्पणियां कानून के किन प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं और क्या उनके प्रसारण से संबंधित अन्य कानूनी पहलू भी लागू होते हैं।

मेडिकल शिक्षा में शवों का विशेष महत्व

चिकित्सा शिक्षा में मानव शवों का उपयोग लंबे समय से अध्ययन और प्रशिक्षण के लिए किया जाता रहा है। मेडिकल संस्थानों में छात्रों को मानव शरीर की संरचना समझाने के लिए कैडवर (शव) का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से चिकित्सा क्षेत्र में शवों के प्रति सम्मान और गरिमा बनाए रखना एक महत्वपूर्ण नैतिक सिद्धांत माना जाता है।

यही कारण है कि इस मामले ने चिकित्सा समुदाय और आम लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

किन कानूनी प्रावधानों के तहत हो सकती है कार्रवाई?

मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के कुछ प्रावधानों से जुड़ा बताया जा रहा है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों पर निर्भर करेगी, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई धाराएं लागू हो सकती हैं।

यदि किसी व्यक्ति को मृतक की गरिमा का अपमान करने या सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई संभव है। ऐसे मामलों में अदालत परिस्थितियों के आधार पर कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा सुना सकती है।

IT Act की धारा 67 भी बन सकती है बड़ी वजह

चूंकि कथित टिप्पणी का वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित हुआ है, इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी जांच के दायरे में आ सकती है।

इस प्रावधान के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की कैद और आर्थिक दंड का प्रावधान है। वहीं दोबारा दोष सिद्ध होने की स्थिति में सजा और जुर्माने की अवधि बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत और जांच एजेंसियों के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।

जांच के बाद तय होगी आगे की कानूनी दिशा

फिलहाल मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां वायरल वीडियो, उसके संदर्भ और उसमें शामिल व्यक्तियों की भूमिका का परीक्षण कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों के खिलाफ कौन-कौन सी धाराएं लागू होंगी और कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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