राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने घोषणा की है कि वह मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर अयोध्या जिला अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम में आस्था रखते हुए दान दिया था, इसलिए उन्हें यह जानने का पूरा अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।
अयोध्या अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी
भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह 5 या 6 जुलाई को अपने वरिष्ठ अधिवक्ता से कानूनी सलाह लेने के बाद अयोध्या जाएंगे और अदालत में मामला दायर करेंगे। उन्होंने बताया कि वह राम मंदिर निर्माण के लिए पहले ही 1.11 लाख रुपये का दान दे चुके हैं और आज भी उनके पास उस दान की रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है।
उनका कहना था कि यदि दान की राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
‘करोड़ों श्रद्धालुओं को जानने का अधिकार’
दिग्विजय सिंह ने कहा कि देशभर के लाखों-करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था के चलते मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। ऐसे में यदि धन के उपयोग में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े किसी भी चंदे के उपयोग में पूरी पारदर्शिता होना आवश्यक है और श्रद्धालुओं को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके द्वारा दिया गया धन कहां और किस उद्देश्य के लिए खर्च किया गया।
अदालत के फैसले पर वापस मांगेंगे दान की राशि
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि अदालत यह मानती है कि दान की राशि के उपयोग में अनियमितता हुई है, तो वह अपने द्वारा दिए गए 1.11 लाख रुपये वापस मांगेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा होता है तो वह पूरी राशि किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्था या किसी शंकराचार्य के ट्रस्ट को दान कर देंगे।
धर्म विरोधी होने के आरोपों का दिया जवाब
कार्यक्रम के दौरान दिग्विजय सिंह ने अपने ऊपर लगाए जाने वाले धर्म विरोधी होने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह सनातन परंपरा का पालन करते हैं, नियमित धार्मिक अनुष्ठान करते हैं और नर्मदा परिक्रमा जैसी धार्मिक यात्राएं भी पूरी कर चुके हैं। उनके अनुसार धार्मिक आस्था और वित्तीय पारदर्शिता दोनों अलग-अलग विषय हैं और दोनों का सम्मान होना चाहिए।
धार्मिक चंदे में पारदर्शिता की उठाई मांग
दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं द्वारा जुटाए गए चंदे के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।
इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि वह अपने घर के बाहर एक पट्टिका लगवाएंगे, जिस पर लिखा होगा कि “मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है।” उन्होंने लोगों से भी धार्मिक चंदे के उपयोग को लेकर पारदर्शिता की मांग करने की अपील की।
