Cyber Crime: बैंक खातों में जमा होती थी साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग की रकम, फिर दूसरे खातों में किया जाता था ट्रांसफर
अमरावती: महाराष्ट्र के अमरावती शहर में साइबर अपराध से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। अमरावती साइबर पुलिस ने कथित तौर पर म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर अपराधियों को मदद पहुंचाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। जांच के दौरान करीब 71 लाख रुपये के वित्तीय लेन-देन का पता चला है।
साइबर ठगी की रकम के लिए इस्तेमाल हो रहे थे बैंक खाते
पुलिस के मुताबिक, तकनीकी विश्लेषण के दौरान साइबर अपराध से जुड़े कुछ बैंक खातों की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं। जांच में आशंका सामने आई कि साइबर धोखाधड़ी, ऑनलाइन गेमिंग और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेन-देन के जरिए हासिल की गई रकम पहले कुछ बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों और अन्य माध्यमों से रकम को आगे ट्रांसफर किया जाता था।
पुलिस जांच में ऐसे खातों के जरिए करीब 71 लाख रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आने के बाद पहले दो मामले दर्ज किए गए थे। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद तकनीकी जांच का दायरा बढ़ाया गया तो इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों तक पुलिस पहुंची।
दो अलग-अलग मामलों में 6 आरोपियों की गिरफ्तारी
अमरावती साइबर पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर दो अन्य मामलों में कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करण दिनेश तानोलकर, निवासी म्हाडा कॉलोनी, न्यूटाउन बडनेरा, रोहन प्रभाकर वैद्य, निवासी पवन नगर, नई बस्ती बडनेरा, सौरभ नितिन नेपाले, निवासी नाथवाड़ी, अमरावती और अजिंक्य गजानन गिरी, निवासी न्यू कॉलोनी, दस्तूर नगर, अमरावती के रूप में हुई है।
वहीं दूसरे मामले में पुलिस ने विजय महेशलाल झामनानी, निवासी रामपुरी कैंप, गली नंबर 2, अमरावती और मयूर हरिश मोटवानी, निवासी कृष्णा नगर, गली नंबर 1, अमरावती को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद अदालत ने सभी 6 आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और म्यूल अकाउंट के जरिए कितनी रकम को अलग-अलग खातों में पहुंचाया गया।
मोबाइल, सिम, पासबुक और एटीएम कार्ड बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए 6 मोबाइल फोन और 6 सिम कार्ड मिले हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंकों की पासबुक, एटीएम कार्ड और कई बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज एवं विवरण भी जब्त किए गए हैं।
इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस अब कथित साइबर नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगालने की कोशिश कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों से हासिल रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया।
अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े होने का शक
अमरावती साइबर पुलिस की कार्रवाई से संकेत मिल रहा है कि मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस इसे अंतरराज्यीय गिरोह से जोड़कर जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका सामने आने की संभावना है।
पुलिस अब बैंकिंग लेन-देन, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और खातों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि रकम कहां से आई, किन खातों में भेजी गई और इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस ने लोगों को दी म्यूल अकाउंट से बचने की चेतावनी
साइबर थाना पुलिस निरीक्षक महेंद्र अंभोरे ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के कमीशन या लालच में आकर अपना बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, यूपीआई या बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को न दें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता खुलवाने, अपना खाता उपलब्ध कराने या किसी अन्य तरीके से ‘म्यूल अकाउंट’ के लिए एजेंट बनने का लालच देता है तो सावधान रहें। ऐसी गतिविधि सामने आने पर तत्काल साइबर पुलिस को इसकी जानकारी देने की अपील की गई है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है जिसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति या गिरोह की अवैध रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक को कमीशन या आसान कमाई का लालच दिया जाता है। लेकिन ऐसे खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध की रकम के लेन-देन में होने पर खाताधारक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।
अमरावती की यह कार्रवाई एक बार फिर बताती है कि साइबर अपराधी सिर्फ ऑनलाइन ठगी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ठगी की रकम को छिपाने और अलग-अलग खातों के जरिए आगे पहुंचाने के लिए बैंकिंग नेटवर्क का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाता, एटीएम, यूपीआई या बैंकिंग जानकारी देना भारी पड़ सकता है।
