NEET और परीक्षा व्यवस्था पर देशभर में बढ़ा विरोध, राहुल गांधी बोले- छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं; सरकार ने भी दिया जवाब

नई दिल्ली : देश में नीट परीक्षा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब कई राज्यों तक पहुंच चुका है। छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न विपक्षी दलों के समर्थन के चलते यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में बना हुआ है।

प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने पहुंचे, जहां सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चाओं में आ गया।

घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन

बुधवार को कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसद मकर द्वार के बाहर काले कपड़े पहनकर पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

विपक्ष का कहना है कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने के बजाय उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि लाखों युवाओं का भविष्य इस मुद्दे से जुड़ा हुआ है।

राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में उठाई आवाज

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। संसद मार्च के दौरान उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।

राहुल गांधी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उनके अनुसार, पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर होता है और इससे उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा देते हैं, लेकिन यदि अंतिम समय में पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो उनका मनोबल प्रभावित होता है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की जा रही है।

उन्होंने कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे हैं।

सरकार ने विपक्ष के आरोपों का किया जवाब

वहीं केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विपक्ष इस संवेदनशील विषय का राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।

कई राज्यों में भी दिखा विरोध प्रदर्शन

दिल्ली के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन देखने को मिले। गुजरात के अहमदाबाद में भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। पुलिस ने लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

इधर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लगातार जारी है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

शिक्षा व्यवस्था पर राष्ट्रीय बहस तेज

नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे इस आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष सरकार से संसद में चर्चा और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि इस विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

आने वाले दिनों में संसद के भीतर होने वाली बहस, सरकार के फैसले और आंदोलन की दिशा यह तय करेगी कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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