रांची: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा JPSC और JSSC की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी परीक्षा, चयन प्रक्रिया या नियुक्ति सरकार के फैसले के कारण प्रभावित हो रही थी। अदालत के आदेश की खबर सामने आने के बाद रांची सचिवालय के बाहर अभ्यर्थियों और प्रभावित उम्मीदवारों के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला।
22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर लगी रोक
दरअसल, झारखंड सरकार ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों से जुड़ी सीआईडी और एसआईटी जांच के निष्कर्षों के आधार पर कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। सरकार के इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई थी। प्रभावित उम्मीदवारों ने इस निर्णय को अदालत में चुनौती देते हुए अपनी याचिकाएं दायर की थीं।
अब झारखंड हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों के लिए राहत की उम्मीद जगी है, जिनका चयन हो चुका था या जो भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच चुके थे।
किन परीक्षाओं और भर्तियों पर पड़ा था असर?
राज्य सरकार के फैसले से कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाएं और भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हुई थीं। इनमें JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और JSSC-CGL के माध्यम से होने वाली नियुक्तियां प्रमुख हैं। इसके अलावा सिविल जज, डिप्टी कलेक्टर, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, लेक्चरर, असिस्टेंट इंजीनियर, वन रेंज अधिकारी और सहायक वन संरक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों की भर्ती भी इस विवाद के दायरे में आई थी।
इन परीक्षाओं में सफल होने वाले कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। कुछ उम्मीदवार सरकारी सेवा में योगदान भी दे चुके थे। ऐसे में परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द किए जाने के फैसले से उनकी नौकरी पर सीधे संकट खड़ा हो गया था।
सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ चार अलग-अलग याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई थीं। इन याचिकाओं में 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा के सफल उम्मीदवार शामिल थे। अवधेश कुमार, दीपमाला, सोनम कुमारी और सौरभ सिंह समेत अन्य सफल अभ्यर्थियों ने सरकार के आदेश को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य रूप से यह तर्क रखा गया कि सरकार ने परीक्षा और उसके बाद की नियुक्तियों को रद्द करने से पहले प्रभावित अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया। अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि किसी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, लेकिन बिना प्रभावित उम्मीदवारों को सुनवाई का मौका दिए पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करना उचित नहीं है।
नियुक्त हो चुके कर्मचारियों की नौकरी पर भी मंडरा रहा था खतरा
इस पूरे विवाद का सबसे गंभीर पहलू यह था कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी सेवा में शामिल हो चुके थे। परीक्षा रद्द किए जाने के सरकारी निर्णय के बाद ऐसे उम्मीदवारों की नियुक्तियां भी संकट में आ गई थीं। यही वजह है कि प्रभावित अभ्यर्थियों ने न्यायालय का रुख किया और सरकार के आदेश को चुनौती दी।
हाईकोर्ट की ओर से रद्दीकरण के आदेश पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद इन अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। हालांकि, मामले की अंतिम तस्वीर आगे होने वाली सुनवाई और अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
छात्रों के आंदोलन के बीच आया हाईकोर्ट का फैसला
परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद झारखंड में अभ्यर्थियों का विरोध लगातार तेज हुआ था। उम्मीदवारों ने सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अपनी नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया को बहाल करने की मांग की थी। कई अभ्यर्थियों का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन सभी सफल उम्मीदवारों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अदालत के फैसले से जहां प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत मिली है, वहीं राज्य सरकार के सामने भी अपने फैसले को लेकर कानूनी पक्ष मजबूती से रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब JPSC और JSSC से जुड़ी प्रभावित परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर आगे की प्रक्रिया अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेगी। अभ्यर्थियों के लिए यह आदेश फिलहाल राहत लेकर आया है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया का अंतिम भविष्य अदालत के अंतिम फैसले से तय होगा।
इस मामले पर अभ्यर्थियों की नजर अब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है। लंबे समय से परीक्षा और नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता झेल रहे उम्मीदवारों के लिए अंतरिम रोक उम्मीद की एक बड़ी किरण मानी जा रही है।
