JSSC CGL परीक्षा रद्द होने पर फूटा अभ्यर्थियों का गुस्सा, बैरिकेडिंग तोड़कर सचिवालय में घुसे प्रदर्शनकारी; बोले- ‘नौकरी वापस लेकर रहेंगे’

JSSC CGL Exam Cancelled: झारखंड में JSSC-CGL समेत 22 परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के बाद सफल अभ्यर्थियों का गुस्सा सड़क पर उतर आया है। रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन यानी झारखंड मंत्रालय के बाहर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। देखते ही देखते विरोध-प्रदर्शन उग्र हो गया और कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य द्वार पर लगी बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए सुरक्षा घेरा पार कर सचिवालय परिसर में प्रवेश कर लिया। प्रदर्शनकारी सरकार से परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने और उनकी नौकरी बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

नौकरी जाने की खबर से सड़क पर उतरे सफल अभ्यर्थी

JSSC-CGL परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें अचानक नौकरी खत्म होने की जानकारी दी गई। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के मुताबिक, मंगलवार शाम तक वे अपने-अपने कार्यालयों में नियमित रूप से काम कर रहे थे, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्हें पता चला कि परीक्षा रद्द कर दी गई है और उनकी नियुक्ति भी खत्म हो गई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जिस नौकरी के लिए उन्होंने वर्षों तक मेहनत की, परीक्षा पास की और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की, वह अचानक एक फैसले से खत्म कर दी गई। इससे उनके परिवारों के सामने भी आर्थिक और मानसिक संकट खड़ा हो गया है।

‘एक दिन पहले तक सरकार का हिस्सा थे, आज सड़क पर हैं’

प्रदर्शन में शामिल एक अभ्यर्थी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि एक दिन पहले तक वे राज्य सरकार के ही कर्मचारी थे और अपने दफ्तरों में काम कर रहे थे। अगले ही दिन उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके परिवारों को भी इस फैसले से गहरा झटका लगा है। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि घरवालों को समझ नहीं आ रहा कि अचानक नौकरी खत्म होने के बाद आगे क्या होगा। मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने सरकार से न्याय की मांग करते हुए नारेबाजी भी की।

‘परीक्षा रद्द करने का आधार क्या है?’

सफल अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल परीक्षा रद्द करने के आधार को लेकर है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि गड़बड़ी किसने की, कौन लोग जिम्मेदार हैं और जांच में क्या सामने आया है।

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यदि कुछ उम्मीदवारों ने गलत तरीके से परीक्षा पास की है, तो उनकी पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन कथित अनियमितताओं की सजा उन अभ्यर्थियों को नहीं मिलनी चाहिए जिन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास कर नियुक्ति हासिल की है।

करीब 2000 परिवारों पर संकट का दावा

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने दावा किया कि JSSC-CGL के जरिए नियुक्त हुए करीब 2000 कर्मचारियों और अधिकारियों के परिवार इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने कुछ ही समय में ऐसा फैसला ले लिया, जिससे हजारों लोगों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को फैसला लेने से पहले सफल उम्मीदवारों का पक्ष भी सुनना चाहिए था। उनका सवाल है कि अगर किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो ईमानदारी से चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना कितना उचित है।

‘भीड़ के दबाव में फैसले से कैसे मिलेगा न्याय?’

प्रदर्शनकारियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि परीक्षा रद्द करने का फैसला कथित तौर पर दबाव के बीच लिया गया। एक अभ्यर्थी ने कहा कि अगर किसी परीक्षा में कुछ लोग गड़बड़ी का आरोप लगाते हैं, तो क्या हर बार परीक्षा रद्द कर देना ही समाधान होगा?

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा दोबारा आयोजित होती है तो लाखों उम्मीदवार फिर से परीक्षा देंगे। ऐसे में असफल उम्मीदवारों का एक वर्ग परीक्षा रद्द करने की मांग कर सकता है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में उन उम्मीदवारों के साथ न्याय कैसे होगा जिन्होंने पहले ही परीक्षा पास करके नियुक्ति हासिल कर ली है।

सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

JSSC-CGL अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार से परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी नौकरी से वंचित नहीं होना चाहते।

उनका कहना है कि यदि परीक्षा या चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का कोई ठोस मामला है तो दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा और नियुक्ति को रद्द कर सभी सफल अभ्यर्थियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।

कोर्ट जाने की तैयारी, न्यायपालिका पर जताया भरोसा

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उनका दावा है कि उनकी नियुक्ति भी न्यायालय के आदेश के बाद हुई थी और अब वे सरकार के फैसले को कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अदालत का रुख करेंगे और अपनी नौकरी बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उनका विश्वास है कि न्यायालय से उन्हें राहत मिलेगी। इसी के साथ उन्होंने सरकार से भी आग्रह किया कि वह मामले को गंभीरता से लेते हुए सफल अभ्यर्थियों की बात सुने और फैसला वापस ले।

प्रोजेक्ट भवन में प्रवेश से बढ़ा तनाव

विरोध-प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार पर लगी बैरिकेडिंग को तोड़ दिया। प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा पार कर सचिवालय परिसर के भीतर प्रवेश कर गए।

घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और अपनी नियुक्ति बहाल करने की मांग पर अड़े रहे।

JSSC CGL विवाद ने फिर पकड़ा तूल

JSSC-CGL परीक्षा और नियुक्तियों को लेकर विवाद झारखंड में पहले से ही चर्चा का विषय रहा है। अब परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद सफल अभ्यर्थियों का विरोध इस मुद्दे को फिर से केंद्र में ले आया है।

एक तरफ सरकार के फैसले को लेकर परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ सफल उम्मीदवारों का सवाल है कि यदि उन्होंने ईमानदारी से परीक्षा पास की है तो उन्हें नौकरी से क्यों हटाया जा रहा है। फिलहाल अभ्यर्थियों का आंदोलन और उनकी संभावित कानूनी लड़ाई इस पूरे मामले को आगे किस दिशा में ले जाती है, इस पर सभी की नजर है।

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