नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले राष्ट्रीय राजनीति का माहौल तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों में जारी अंदरूनी उथल-पुथल और संभावित राजनीतिक पुनर्संरेखण ने संसद के अंकगणित को नई दिशा दे दी है। इसी बीच महिला आरक्षण पैकेज से जुड़े संविधान संशोधन और परिसीमन बिल को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात पर नजर बनी हुई है कि यदि मौजूदा समीकरण कायम रहे तो केंद्र की एनडीए सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की स्थिति में पहुंच सकती है।
अप्रैल में अटक गया था अहम विधेयक
कुछ महीने पहले लोकसभा में एकजुट विपक्ष के कारण सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया था। उस समय संविधान संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल नहीं हो सके थे। लेकिन अब विपक्षी खेमे में पैदा हुई नई परिस्थितियों ने राजनीतिक तस्वीर बदल दी है।
विपक्षी दलों में बगावत से बदले समीकरण
राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की घटनाएं हैं। पश्चिम बंगाल में चुनावी झटकों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई हैं। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कई सांसदों ने अलग राह अपनाने का फैसला किया है, जिससे संसद में उसकी ताकत प्रभावित हो सकती है।
इसी तरह महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के भीतर राजनीतिक हलचल जारी है। सूत्रों के मुताबिक कुछ सांसदों के दूसरे खेमे में जाने की संभावनाओं ने राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
एनडीए को कैसे मिल सकता है फायदा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों में टूट-फूट की स्थिति आगे भी बनी रहती है तो इसका सीधा लाभ एनडीए को मिल सकता है। संसद में संख्या बल बढ़ने से सरकार के लिए बड़े विधेयकों को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
यही वजह है कि आगामी मानसून सत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्ता पक्ष की नजर उन सांसदों और दलों पर भी है जो फिलहाल किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं या राजनीतिक रूप से तटस्थ भूमिका में हैं।
लोकसभा का पूरा अंकगणित समझिए
लोकसभा में किसी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। मौजूदा परिस्थितियों में विभिन्न दलों के सांसदों की स्थिति और संभावित समर्थन को लेकर लगातार राजनीतिक गणनाएं की जा रही हैं।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार यदि कुछ बागी सांसद सत्ता पक्ष का समर्थन करते हैं तो एनडीए और आवश्यक बहुमत के बीच का अंतर काफी कम हो सकता है। यही कारण है कि संसद के आगामी सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
डीएमके की भूमिका पर भी टिकी नजर
तमिलनाडु की राजनीति भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कुछ मुद्दों पर केंद्र और डीएमके के बीच संवाद की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। यदि किसी स्तर पर समर्थन का समीकरण बनता है तो संसद का गणित और तेजी से बदल सकता है।
हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे संभावित गेमचेंजर के रूप में देखा जा रहा है।
राज्यसभा में भी महत्वपूर्ण होगा संख्या बल
लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी संख्या बल की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए दोनों सदनों में पर्याप्त समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में राजनीतिक दलों की रणनीति केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यसभा के समीकरणों पर भी बराबर नजर रखी जा रही है।
मानसून सत्र पर देश की नजर
आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण, परिसीमन और अन्य बड़े सुधारों से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। यदि सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है तो कई महत्वपूर्ण विधेयकों की राह आसान हो सकती है। वहीं विपक्ष भी अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटा हुआ है। ऐसे में आने वाले सप्ताह देश की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
