‘बेटे को खोया, मदद भी नहीं मिली’… बलिदानी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम के पिता का दर्द, 21 लाख के चेक को लेकर उठाए सवाल

जहानाबाद: असम में विमान दुर्घटना के दौरान देश की सेवा करते हुए बलिदान देने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिवार का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बेटे को खोने के गम से जूझ रहे पिता अमरेंद्र शर्मा ने अब सरकारी सहायता राशि को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परिवार को बिना जानकारी दिए 21 लाख रुपये का मुआवजा शुभम की कथित पत्नी को सौंप दिया गया, जबकि उन्हें इस बारे में कोई सूचना तक नहीं दी गई।

बलिदान के बाद परिवार पर टूटा एक और संकट

फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के निधन के बाद पूरा परिवार सदमे में है। पिता अमरेंद्र शर्मा का कहना है कि शुभम ही घर का सबसे बड़ा सहारा थे और उनके जाने के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों तरह के संकट से गुजर रहा है। ऐसे मुश्किल समय में सरकारी सहायता परिवार के लिए उम्मीद की किरण बन सकती थी, लेकिन घटनाक्रम ने उन्हें और अधिक आहत कर दिया।

अमरेंद्र शर्मा के अनुसार, बेटे के बलिदान की सूचना मिलने के बाद श्रेया राय नाम की युवती आजमगढ़ से बिहार पहुंची थीं। उन्होंने शुभम के पार्थिव शरीर के साथ गांव तक यात्रा की और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में भी शामिल हुईं। परिवार का कहना है कि इसके बाद जो घटनाएं सामने आईं, उन्होंने उन्हें हैरान कर दिया।

21 लाख रुपये का चेक सौंपे जाने पर उठे सवाल

परिजनों के मुताबिक, सरकार की ओर से दी जाने वाली 21 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक स्थानीय प्रशासन द्वारा श्रेया राय को सौंप दिया गया। परिवार का दावा है कि इस प्रक्रिया की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। अगले दिन जब उन्हें इस बारे में पता चला तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, जहां चेक दिए जाने की पुष्टि हुई।

पिता अमरेंद्र शर्मा का कहना है कि यदि शुभम और श्रेया के बीच वैधानिक विवाह हुआ था तो वह उनकी बहू हैं और सहायता राशि पाने का अधिकार भी रखती हैं। लेकिन उनका सवाल यह है कि परिवार को इस पूरी प्रक्रिया से अलग क्यों रखा गया और उन्हें इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई।

‘श्राद्धकर्म से पहले ही चली गईं’, पिता ने जताई नाराजगी

शुभम के पिता का आरोप है कि सहायता राशि प्राप्त करने के बाद श्रेया राय परिवार के साथ नहीं रहीं और अपने शहर लौट गईं। उनका कहना है कि दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ रहना और जिम्मेदारियां निभाना भी उतना ही जरूरी था। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई।

परिवार को नहीं थी कोर्ट मैरिज की जानकारी

परिवार के सदस्यों के अनुसार शुभम कुमार और श्रेया राय एक-दूसरे को पसंद करते थे और दोनों के रिश्ते को परिवार की स्वीकृति भी प्राप्त थी। परिजनों का कहना है कि दोनों की शादी की योजना बनाई गई थी। पहले इसी वर्ष विवाह होने वाला था, लेकिन परिवार में हुई एक मृत्यु के कारण इसे आगे बढ़ाकर वर्ष 2027 की होली के बाद करने का निर्णय लिया गया था।

परिवार का दावा है कि उन्हें किसी कोर्ट मैरिज या कानूनी विवाह की जानकारी नहीं थी। यही वजह है कि सहायता राशि के वितरण को लेकर उनके मन में कई सवाल खड़े हो गए हैं।

रक्षा मंत्री से लगाई आर्थिक सहायता की गुहार

अमरेंद्र शर्मा ने देश के रक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि बेटे के बलिदान के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है और आर्थिक रूप से भी कठिन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से परिवार के लिए अलग से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।

शुभम कुमार का बलिदान पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, लेकिन उनके परिवार के सामने खड़े नए विवाद और आर्थिक चिंताओं ने इस दुखद घटना को और भी संवेदनशील बना दिया है। अब परिवार को उम्मीद है कि सरकार और संबंधित विभाग उनकी स्थिति को समझते हुए उचित निर्णय लेंगे।

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