यात्री बस में छिपा था 245 किलो गांजा, ओडिशा से छत्तीसगढ़ तक तस्करी का खुलासा; ड्राइवर समेत 2 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पेंड्रा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक यात्री बस की तलाशी के दौरान करीब 245 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। बरामद गांजे को 49 अलग-अलग पैकेटों में छिपाकर रखा गया था। पुलिस के मुताबिक, गांजे की खेप ओडिशा के मलकानगिरी से छत्तीसगढ़ के कोरबा और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र में सप्लाई करने के लिए लाई जा रही थी।

इस कार्रवाई में पुलिस ने बस मालिक सह चालक दिलीप कुमार हिंडिया और उसके कथित स्थानीय सहयोगी भीमसेन केंवट को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(II) और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।

सूचना के आधार पर यात्री बस की तलाशी

पेंड्रा थाना पुलिस को मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध यात्री बस को रोककर उसकी जांच शुरू की। तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में गांजा मिला।

पुलिस के अनुसार, गांजे को कुल 49 पैकेटों में रखा गया था और प्रत्येक पैकेट में करीब पांच किलोग्राम गांजा था। पूरी खेप का वजन लगभग 245 किलोग्राम बताया गया है। पुलिस ने बरामद मादक पदार्थ को नियमानुसार जब्त कर लिया और मामले में दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

बस का मालिक और ड्राइवर खुद तस्करी में शामिल होने का आरोप

गिरफ्तार आरोपितों में दिलीप कुमार हिंडिया, पिता स्वर्गीय कुमार हिंडिया, निवासी नायपुरा, तहसील माथिली, जिला मलकानगिरी, ओडिशा शामिल है। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार दिलीप कुमार उक्त यात्री बस का मालिक होने के साथ-साथ उसका चालक भी है।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसने गांजे के अवैध परिवहन में स्वयं शामिल होने की बात बताई। पुलिस अब उसके द्वारा बताए गए तथ्यों की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गांजे की खेप कहां से हासिल की गई थी और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

कटघोरा से बस में सवार हुआ था दूसरा आरोपी

मामले में गिरफ्तार दूसरा व्यक्ति भीमसेन केंवट, पिता रामफल केंवट, उम्र 30 वर्ष, निवासी धनौरा, मौहरपारा, थाना मरवाही बताया गया है।

पुलिस की जांच के अनुसार भीमसेन केंवट कटघोरा से बस में सवार हुआ था। आरोप है कि वह बस चालक के साथ आगे के रास्ते की जानकारी देते हुए यात्रा कर रहा था। पुलिस ने उसे भी इस कथित तस्करी में सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

मलकानगिरी से कोरबा और गौरेला तक पहुंचानी थी गांजे की खेप

प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस के सामने गांजा तस्करी से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक, दिलीप कुमार हिंडिया ने बताया कि गांजा मलकानगिरी, ओडिशा से लेकर छत्तीसगढ़ के कोरबा और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र में सप्लाई करने के लिए लाया जा रहा था।

245 किलो गांजे की इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं। जांच एजेंसियां गांजा उपलब्ध कराने वाले स्रोत से लेकर इसे आगे खपाने वाले लोगों तक पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं।

मलकानगिरी से पेंड्रा तक बनाया गया था पूरा रूट

पुलिस के मुताबिक, गांजा तस्करी के लिए आरोपितों ने एक निर्धारित सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया। कथित तस्करी का रूट मलकानगिरी → बोरई → धमतरी → रायपुर → बिलासपुर → पाली → कटघोरा → पसान → पेंड्रा तक तय किया गया था।

इसी रास्ते से गांजे की खेप को छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाने की तैयारी थी। यात्री बस का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि तस्करी के लिए बस का इस्तेमाल पहले भी किया गया था या यह पहली खेप थी।

अब आगे क्या करेगी पुलिस?

245 किलोग्राम गांजा बरामद होने के बाद पेंड्रा पुलिस की जांच अब केवल गिरफ्तार किए गए दो आरोपितों तक सीमित नहीं है। पुलिस कथित तस्करी नेटवर्क के फारवर्ड और बैकवर्ड लिंक की पड़ताल कर रही है।

जांच का उद्देश्य गांजे की सप्लाई करने वाले स्रोत, इसे छत्तीसगढ़ तक पहुंचाने वाले लोगों और गंतव्य क्षेत्र में इसकी कथित सप्लाई से जुड़े व्यक्तियों की पहचान करना है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।

एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ NDPS Act की धारा 20(B)(II) और 29 के तहत मामला दर्ज किया है। जब्त किए गए 245 किलोग्राम गांजे को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

पेंड्रा पुलिस की इस कार्रवाई को क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि, तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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