नई दिल्ली : मथुरा स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और धार्मिक परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। मंदिर के सेवकों द्वारा दायर याचिका में कोर्ट की ओर से गठित उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति के कुछ फैसलों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि समिति के कुछ निर्णयों से मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉज लिस्ट के अनुसार इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ करेगी। यह मामला न केवल मंदिर प्रशासन बल्कि धार्मिक परंपराओं और वृंदावन क्षेत्र के भविष्य के विकास से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
किन फैसलों पर उठाए गए सवाल?
मंदिर के सेवकों ने अपनी याचिका में प्रबंधन समिति के कुछ निर्णयों पर आपत्ति जताई है। इनमें श्रद्धालुओं के दर्शन का समय बढ़ाने और पारंपरिक ‘देहरी पूजा’ व्यवस्था को बंद किए जाने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ऐसे कदमों से मंदिर की प्राचीन परंपराएं प्रभावित हो रही हैं, जिन्हें वर्षों से निर्धारित रीति-रिवाजों के अनुसार निभाया जाता रहा है।
धार्मिक परंपराओं और प्रशासन के बीच संतुलन की कोशिश
इससे पहले 26 मई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति के दायरे का विस्तार किया था। अदालत ने ‘राज भोग’ और ‘शयन भोग’ गोस्वामी समूहों से चार निर्वाचित प्रतिनिधियों को समिति में शामिल करने का निर्देश दिया था। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मंदिर के प्रशासनिक निर्णयों में पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों का भी समुचित प्रतिनिधित्व बना रहे।
मंदिर के समय और व्यवस्था पर मांगे गए सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने नए सदस्यों को निर्देश दिया था कि वे मंदिर की परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए दैनिक संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय सुझाएं। इसमें मौसम के अनुसार दर्शन और पूजा के समय में संभावित बदलावों को लेकर भी सुझाव देने को कहा गया था। अदालत चाहती है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।
वृंदावन के समग्र विकास पर भी रहेगा फोकस
सुनवाई के दौरान मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास का मुद्दा भी प्रमुख रहने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार और प्रबंधन समिति को एक व्यापक विकास योजना तैयार करने का निर्देश दे चुका है। इस योजना का उद्देश्य बढ़ती श्रद्धालु संख्या को ध्यान में रखते हुए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
सड़क, पानी, अस्पताल और यातायात सुविधाओं पर जोर
प्रस्तावित विकास योजना में सड़क चौड़ीकरण, व्यावसायिक गतिविधियों का नियमन, तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, विश्राम स्थल और परिवहन सुविधाओं के विस्तार जैसे बिंदु शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिए जाने की संभावना है।
अगस्त 2025 में बनी थी हाई-लेवल मैनेजमेंट कमेटी
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने श्री बांके बिहारी मंदिर के रोजमर्रा के संचालन और व्यवस्था की निगरानी के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति का गठन किया था। इस समिति को भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालु सुविधाओं और मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
ट्रस्ट अध्यादेश के कुछ प्रावधानों पर भी लगी है रोक
समिति के गठन के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ‘श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025’ के कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक भी लगा दी थी। इन प्रावधानों के तहत राज्य सरकार को मंदिर के प्रबंधन के लिए अलग ट्रस्ट गठित करने का अधिकार दिया गया था। अदालत ने यह रोक तब तक जारी रखने का फैसला किया था, जब तक इलाहाबाद हाई कोर्ट इस अध्यादेश की वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं दे देता।
आज की सुनवाई क्यों है अहम?
माना जा रहा है कि आज की सुनवाई में मंदिर की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा और वृंदावन के भविष्य के विकास को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं। ऐसे में देशभर के श्रद्धालुओं, मंदिर सेवकों और प्रशासनिक अधिकारियों की नजरें सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।
