Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी एनकाउंटर में नया ट्विस्ट, पिता-भाई भी FIR में नामजद, 14 लोगों समेत 50 अज्ञात पर कार्रवाई

बिहार : बिहार के भोजपुर जिले में चर्चा का केंद्र बने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस मुठभेड़, वायरल वीडियो और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन के बीच अब मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया है। वहीं एनकाउंटर के बाद हुए सड़क जाम और हंगामे को लेकर 14 नामजद तथा 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है तथा पूरे राज्य की नजर जांच पर टिकी हुई है।

अब तक तीन FIR, लेकिन मां की शिकायत पर स्थिति स्पष्ट नहीं

जानकारी के अनुसार भरत तिवारी प्रकरण में अब तक कुल तीन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें एक प्राथमिकी शाहपुर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार द्वारा दर्ज कराई गई है, जिन्हें बाद में निलंबित कर दिया गया था। हालांकि भरत तिवारी की मां द्वारा पुलिस कार्रवाई को लेकर दी गई शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं, इस पर अभी तक पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

17 जून की सुबह शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच कथित मुठभेड़ हुई थी। पुलिस का कहना है कि उसे सूचना मिली थी कि भरत के पास अवैध हथियार हैं और वह किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम गांव पहुंची और उसके घर की घेराबंदी की गई।

पुलिस के अनुसार जैसे ही दरवाजा खुला, भरत तिवारी हथियार के साथ सामने आया और पुलिस टीम पर हमला करने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि उसने फायरिंग भी की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया।

वायरल वीडियो ने खड़े किए कई सवाल

एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। वीडियो में कथित तौर पर यह दिखाई देता है कि भरत तिवारी पुलिस की ओर हथियार फेंकता नजर आ रहा है। इसके बाद भी गोली चलने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी वजह से परिजन, स्थानीय लोग और कई राजनीतिक संगठन पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

इलाज के दौरान हुई भरत तिवारी की मौत

मुठभेड़ में घायल होने के बाद भरत भूषण तिवारी को पहले आरा सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत की खबर सामने आते ही इलाके में तनाव बढ़ गया और लोगों का आक्रोश फूट पड़ा।

शव रखकर किया गया विरोध प्रदर्शन

भरत तिवारी की मौत के बाद परिजनों और समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई को संदिग्ध बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरा-बक्सर फोरलेन पर शव रखकर कई घंटों तक सड़क जाम किया गया। इसके कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

पुलिस का कहना है कि सड़क जाम के दौरान सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई और कानून व्यवस्था प्रभावित हुई। इसी आधार पर अलग से प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पिता और भाई पर क्या हैं आरोप?

नई प्राथमिकी में पुलिस ने भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया है। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने भरत को संरक्षण दिया और उसके पास मौजूद कथित अवैध हथियारों को छिपाने में सहयोग किया। जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

हालांकि परिवार की ओर से इन आरोपों को लेकर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

सड़क जाम मामले में 14 नामजद, 50 से अधिक अज्ञात पर केस

भरत तिवारी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में 14 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है जबकि 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार वीडियो फुटेज, फोटोग्राफ और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से अज्ञात लोगों की पहचान की जा रही है। पहचान पूरी होने के बाद उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक गलियारों में भी तेज हुई बहस

एनकाउंटर के बाद यह मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है। विभिन्न दलों के नेता लगातार बेलौटी गांव पहुंचकर परिजनों से मुलाकात कर रहे हैं। जन सुराज, भाकपा-माले समेत कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

विपक्षी दलों का कहना है कि वायरल वीडियो और पुलिस के दावों के बीच कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अभी तक नहीं मिला है। कई संगठनों ने एसआईटी जांच, न्यायिक जांच, पीड़ित परिवार को मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई है।

जांच पर टिकी हैं सबकी निगाहें

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस अब सिर्फ एक पुलिस मुठभेड़ का मामला नहीं रह गया है। पिता और भाई पर दर्ज एफआईआर, सड़क जाम मामले में कार्रवाई, वायरल वीडियो और राजनीतिक बयानबाजी ने इसे बिहार के सबसे चर्चित मामलों में शामिल कर दिया है।

एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून सम्मत और तथ्यों पर आधारित बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन और कई संगठन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, वीडियो विश्लेषण और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही यह साफ हो सकेगा कि उस सुबह बेलौटी गांव में वास्तव में क्या हुआ था।

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