नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में 10 जुलाई को हुई अभूतपूर्व घटना के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। अदालत की कार्यवाही के दौरान एक याचिकाकर्ता वकील द्वारा अपशब्द कहने, कोर्ट रूम में कागजात फेंकने और न्यायाधीशों को ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहकर संबोधित करने की घटना पर सीजेआई ने संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं कभी-कभी हो जाती हैं और उन्हें अधिक महत्व देने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना अधिक आवश्यक है।
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
सोमवार को इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार युवा आवेश में इस प्रकार का व्यवहार कर बैठते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों और कानून से जुड़े लोगों से अपील करते हुए कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा, गरिमा और सम्मान बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार न्यायपालिका जैसी संस्थाओं की गरिमा लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?
10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान उस समय अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने पीठ के समक्ष खुद को ‘सर्वोच्च’ बताते हुए न्यायाधीशों को ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने अदालत में मौजूद न्यायाधीशों को निर्देशात्मक भाषा में संबोधित करते हुए लखनऊ के एक एएसपी के खिलाफ साइबर अपराध के मामले में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने की बात कही।
इस दौरान न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए उनसे पूछा कि क्या वे अदालत को आदेश दे रहे हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया और कोर्ट रूम में कागजात उछाल दिए, जिससे कुछ समय के लिए अदालत की कार्यवाही बाधित हो गई।
सुरक्षाकर्मियों ने कोर्ट रूम से बाहर निकाला
स्थिति बिगड़ने पर सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने संबंधित व्यक्ति को कोर्ट रूम से बाहर ले जाकर परिसर में स्थित डीएसपी कार्यालय में कुछ समय के लिए हिरासत में रखा। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद न्यायालय ने तत्काल अवमानना या किसी अन्य दंडात्मक कार्रवाई की शुरुआत नहीं की।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति संभवतः अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक दबाव में था। अदालत ने यह भी कहा कि उसकी हताशा को देखते हुए उसके प्रति सहानुभूति रखी जानी चाहिए।
बार एसोसिएशन ने घटना की कड़ी निंदा की
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि न्यायालय की गरिमा और अदालत की कार्यवाही का सम्मान हर परिस्थिति में किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा कि अदालत में दुर्व्यवहार, धमकी या कार्यवाही में बाधा डालने का कोई भी प्रयास पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह न्याय व्यवस्था की मूल भावना पर सीधा प्रहार है।
उपद्रवियों पर कार्रवाई की भी उठी मांग
सुप्रीम कोर्ट आर्गुइंग काउंसिल एसोसिएशन ने भी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर इस घटना में शामिल व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। एसोसिएशन का कहना है कि अदालत की गरिमा बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।
