नेपाल : नेपाल ने भारत से सरकारी स्तर पर खाद आयात करने की अपनी योजना में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां नेपाल सरकार भारत से 80,000 टन रासायनिक उर्वरक खरीदने की तैयारी कर रही थी, वहीं अब उसने अपनी आवश्यकता कम करते हुए केवल 50,000 टन खाद आयात करने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में आई गिरावट और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
वैश्विक हालात बदलने के बाद बदला नेपाल का रुख
नेपाल का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति को लेकर हालात सामान्य होने लगे हैं। हाल के भू-राजनीतिक तनावों और समुद्री व्यापार मार्गों पर अनिश्चितता के कारण नेपाल ने पहले खाद की बड़ी मात्रा खरीदने की योजना बनाई थी। हालांकि अब वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में सुधार और बाजार में कीमतों में नरमी आने के बाद नेपाल ने अपनी जरूरतों का पुनर्मूल्यांकन किया है।
नेपाल सरकार ने भारत से खाद आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) भी जारी कर दिया है, जिसके तहत 50,000 टन रासायनिक उर्वरक खरीदे जाएंगे।
पहले 80 हजार टन खाद खरीदने की थी योजना
नेपाल सरकार ने मई महीने में भारत से बड़े पैमाने पर उर्वरक खरीदने को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। उस समय प्रस्तावित पैकेज में 60,000 टन यूरिया और 20,000 टन डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) शामिल थे। इससे पहले नेपाल ने भारत के सामने 1.5 लाख टन उर्वरक की मांग भी रखी थी ताकि कृषि क्षेत्र में संभावित संकट से बचा जा सके।
कृषि विशेषज्ञों का मानना था कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में नेपाल को खेती के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने हेतु अतिरिक्त स्टॉक की जरूरत पड़ सकती है।
कृषि मंत्रालय ने बताई नई रणनीति
नेपाल के कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की ओर से 80,000 टन उर्वरक खरीदने की मंजूरी मिलने के बावजूद वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आयात मात्रा कम करने का निर्णय लिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें पहले की तुलना में कम हुई हैं और सरकार के पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए 50,000 टन खाद का आयात फिलहाल पर्याप्त माना गया है। इससे नेपाल को लागत नियंत्रण में रखने के साथ-साथ भविष्य में बाजार परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त खरीद का विकल्प भी मिलेगा।
किसानों और कृषि क्षेत्र पर क्या पड़ेगा असर?
नेपाल की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और खाद की उपलब्धता सीधे फसल उत्पादन को प्रभावित करती है। सरकार का दावा है कि मौजूदा स्टॉक और नए आयात को मिलाकर किसानों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं तो नेपाल को भविष्य में कम लागत पर अतिरिक्त उर्वरक खरीदने का लाभ मिल सकता है।
