West Bengal Border News: अवैध घुसपैठियों पर बड़ा एक्शन, 3 महीने में 2980 बांग्लादेशी वापस भेजे गए, सीमा पर बढ़ा तनाव

पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल से लगी भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ और गैर-कानूनी प्रवासियों की वापसी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत मार्च से जून के बीच बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में कुल 2980 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को भारत से वापस भेजा गया, जिनमें से 1930 लोगों को 19 मई से 10 जून के बीच सीमा पार कराया गया।

19 मई के बाद तेज हुई कार्रवाई

सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 19 मई से अवैध घुसपैठियों की पहचान और निष्कासन की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया गया। इसी अवधि में पश्चिम बंगाल की विभिन्न सीमा चौकियों के माध्यम से बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को वापस भेजा गया, जो भारत में कथित तौर पर गैर-कानूनी रूप से रह रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक, इस अभियान के दौरान कई जिलों में विशेष निगरानी बढ़ाई गई और सीमा क्षेत्रों में जांच अभियान भी तेज किए गए। इसी का परिणाम है कि कुछ ही हफ्तों में हजारों लोगों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई की गई।

मार्च से जून तक क्या कहते हैं आंकड़े?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मार्च महीने में करीब 600 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया था। अप्रैल में यह संख्या लगभग 450 रही। वहीं मई के अंतिम सप्ताह और जून के शुरुआती दिनों में कार्रवाई में तेजी आने के बाद 1930 लोगों को सीमा पार भेजा गया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले कुछ समय में सीमा पार आवाजाही और अवैध प्रवास को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं।

सीमा पर बढ़ा भारत-बांग्लादेश तनाव

अवैध प्रवासियों की वापसी को लेकर भारत और बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बलों के बीच तनाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में लोगों को बिना औपचारिक प्रक्रिया पूरी किए सीमा पार भेजा जा रहा है।

इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के सीमा बलों के बीच कई बार फ्लैग मीटिंग और बातचीत भी हो चुकी है। बांग्लादेश की ओर से नागरिकता सत्यापन और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर जोर दिया जा रहा है, जबकि भारतीय एजेंसियां अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान होने का दावा कर रही हैं।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई चर्चा

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें BSF और BGB के अधिकारियों के बीच एक परिवार की नागरिकता को लेकर बहस होती दिखाई दी। वीडियो में दो महिलाओं और एक छोटे बच्चे की मौजूदगी ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।

वीडियो के सामने आने के बाद सीमा पर चल रही कार्रवाई और नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना वापस नहीं भेजा जाना चाहिए।

नो-मैन्स लैंड में फंसे कई लोग

सीमा क्षेत्र में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां लोगों को सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक नो-मैन्स लैंड में इंतजार करना पड़ा। हाल ही में जलपाईगुड़ी क्षेत्र के पास 10 लोगों का एक समूह सीमा के बीच स्थित क्षेत्र में फंसा रहा। इसके अलावा चापईनवाबगंज इलाके के निकट 28 लोगों को भी रोके जाने की जानकारी सामने आई।

BSF का कहना है कि संबंधित व्यक्तियों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में की जा चुकी है और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए BGB से सहयोग मांगा गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में घुसपैठ का मुद्दा

अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा का विषय लगातार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमा पार अवैध गतिविधियों और गैर-कानूनी प्रवास पर नियंत्रण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसी कारण सीमा क्षेत्रों में निगरानी, सत्यापन और कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

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